जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ: सेबी से मिली मंजूरी, बाजार में दस्तक देगा देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू
मुंबई: भारतीय वित्तीय बाजार के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) की डिजिटल और टेलीकॉम विंग, जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड को बाजार नियामक सेबी (SEBI) से अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए अंतिम मंजूरी मिल गई है। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार, इस महा-इश्यू के तहत कंपनी बाजार में 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करेगी। यह घरेलू शेयर बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ साबित होगा।
निर्गम (Issue) के प्रमुख वित्तीय पहलू
- ऐतिहासिक फंड जुटाने की तैयारी: इस आईपीओ के जरिए कंपनी बाजार से करीब ₹37,700 करोड़ (लगभग 4 बिलियन डॉलर) जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह आकार पिछले सभी बड़े आईपीओ (जैसे हुंडई इंडिया और एलआईसी) के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगा।
- ₹9.5 लाख करोड़ का मूल्यांकन: इस पब्लिक ऑफरिंग के साथ ही बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स का कुल मूल्यांकन लगभग ₹9.5 ट्रिलियन (लाख करोड़) आंका जा रहा है।
- पूर्णतः प्राथमिक पूंजी (No OFS): इस निर्गम की सबसे महत्वपूर्ण संरचना यह है कि इसमें कोई ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) शामिल नहीं है। इसका अर्थ है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज या इसके बड़े वैश्विक भागीदार (जैसे मेटा और गूगल) अपनी हिस्सेदारी का विनिवेश नहीं कर रहे हैं। सभी 27 करोड़ शेयर नए होंगे, जो पोस्ट-इश्यू इक्विटी बेस का 2.9% हिस्सा दर्शाते हैं।
- पूंजी का रणनीतिक आवंटन
आईपीओ के जरिए प्राप्त होने वाली कुल धनराशि का उपयोग मुख्य रूप से कंपनी के बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए किया जाएगा:
- ऋण का पूर्व-भुगतान: प्राप्त राशि में से करीब ₹27,500 करोड़ का उपयोग जियो की मुख्य सहायक कंपनी, रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड (RJIL) के विदेशी मुद्रा ऋण और अन्य बकाये को समय से पहले चुकाने के लिए निर्धारित किया गया है।
- कॉर्पोरेट विकास: बची हुई शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों, नई तकनीकों के विकास और डिजिटल इकोसिस्टम के विस्तार में किया जाएगा।
शेयर आवंटन और निवेशक कैटेगिरी
सेबी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, इस निर्गम को विभिन्न निवेशक श्रेणियों के बीच इस प्रकार विभाजित किया गया है:
- योग्य संस्थागत खरीदार (QIB): नेट ऑफर का 50% हिस्सा बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए आरक्षित है।
- खुदरा व्यक्तिगत निवेशक (Retail): छोटे और व्यक्तिगत निवेशकों के लिए 35% हिस्सा सुरक्षित रखा गया है।
- गैर-संस्थागत निवेशक (NII/HNI): उच्च निवल मूल्य वाले व्यक्तियों के लिए 15% कोटा निर्धारित है।
बाजार और निवेशकों पर प्रभाव
आकाश अंबानी के नेतृत्व वाली जियो प्लेटफॉर्म्स के पास वर्तमान में 52.4 करोड़ से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क है। लगभग दो दशकों में रिलायंस समूह की किसी कंपनी की यह पहली घरेलू लिस्टिंग होगी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस स्तर के आईपीओ से भारतीय शेयर बाजार में भारी मात्रा में लिक्विडिटी (तरलता) आएगी और वैश्विक संस्थागत निवेशकों का घरेलू बाजार के प्रति आकर्षण और गहरा होगा। सेबी से हरी झंडी मिलने के बाद, रिलायंस समूह जल्द ही इस बहुप्रतीक्षित आईपीओ के मूल्य दायरे (Price Band) और खुलने की तारीखों की घोषणा कर सकता है।
