08,अक्टूम्बर, विश्व दृष्टि दिवस
आँखों को स्वस्थ रखने के प्रति जागरुकता जरूरीआधुनिक खान पान से बदलती जीवन शैली के कारण आँखों से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का कहना हैं, कि दृष्टि हानि के 85 प्रतिशत केस रोके जा सकते है या उपचार योग्य है। इसके बारे में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। भारत में आंखों के रोग के प्रति आज भी सतर्कता, सजकता की कमी है। इसी कारण विश्व भर में अंधता के क्षेत्र में भारत का स्थान तीसरे पायदान पर हो गया, यदि जागरूकता बढ़ाकर अंधता को रोका जा सकता है। विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में लगभग 4 करोड़ लोग अंधेपन या मध्यम या गंभीर दृष्टि हानि से पीड़ित है। वहीं एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार 2050 तक दुनिया में करीब 4.76 अरब लोग मायोपिया से प्रभावित हो सकते हैं । इनमें 94 करोड़ को हाई मायोपिया हो सकता है । हाई मायोपिया में रेंटीना से जुड़े जटिलताओं का जोखिम बढ़ता है ।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार विश्व भर में हर 5 सेकंड में एक व्यक्ति दृष्टिहीन हो जाता है। दिल्ली के डॉ. इकेदा लाल ने कहा “भारत। में अंधेपन के सामान्य कारण मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, मैक्यूलर डिजनरेशन, डायबेटिक केटिनीपैथी और कॉर्नियल अंधापन है। दुर्भाग्य से, लोग अक्सर यह नहीं जानते, कि इन सभी स्थितियों का इलाज किया जा सकता है, और अंधेपन को उल्टा किया जा सकता है।
आँखें शरीर की महत्वपूर्ण अंग होती है। कहा गया है, कि आँखों की संरचना अत्यंत जटिल और अद्भूत है। आँखे मनुष्य को ही नहीं बल्कि प्राणी मात्र को प्रकृति द्वारा दिया गया अनुपम उपहार है। समस्त इंद्रियों में आँखों की प्रधानता मानी गई है। जब तक जीवन की इच्छा रहे ।तब तक आंखों की रक्षा सभी प्रकार से करनी चाहिए। है। आंखें हमारे जीवन की ज्योति है। आंखें ही शरीर की सुंदरता और शान है। इसलिए आँखों की सुरक्षा और देखभाल करना बहुत जरूरी है। विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर हम सभी मिलकर सामूहिक प्रयासों से उपचार योग्य अंधता के उन्मूलन का संकल्प ले तो कुछ मामलों में इसका निराकरण हो सकता है। आँखो को विभिन्न विकारों से बचाने हेतु खान-पान में पर्याप्त पौष्टिकता होनी चाहिए। हल्का तथा विटामिन युक्त आहार आँखों के लिए बहुत ही लाभदायक होता है।
आज विश्व दृष्टि दिवस पर आँखों के बारे कई तरह से जानकारी होनी आवश्यक है, उनमें बहुत तेज रोशनी में न पढ़े, तेज रोशनी की तरफ न देखें, लेटे-लेटे पढ़ाई न करें, ग्रहण के समय सूर्य अथवा चंद्रमा को न देखें, टी.वी. दूर से ही देखें, देर तक न देखें, पढ़ाई-लिखाई या टी.वी. देखते समय तेज या कम प्रकाश नहीं होना चाहिए, टी. वी. आँखों के बराबर ऊँचाई पर तीन मीटर दूर होना चाहिए, रात को पढ़ते समय प्रकाश पीछे की ओर से आए लगातार आँखों से श्रम लेने की बजाए पलकें झपकाकर उसे शक्ति-अर्जन यानी विश्राम का अवसर देवे, भोजन में हरी सब्जियां , गाजर, पतागोभी, नारियल, पपीता, दही, मक्खन का समावेश करें, आँखों में कुछ गिर जाए तो मले नहीं, अपना नेपकीन या तौलियां साफ रखें, आँखों को साफ पानी से दिन भर में तीन बार तथा सोने से पहले अवश्य धोएँ। बार-बार आँखे धोने से आँखें स्वस्थ रहती है और उनकी थकान तत्काल दूर हो जाती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) के मामले तेजी से बढ़ रहे है। भारत में भी यह समस्या गंभीर हो रही है। मधुमेह के बाद मायोपिया आँखों की सेहत को बहुत नुकसान पहुंचा रहा है। मायोपिया की समस्या बहुत बढ आने पर मोतियाबिंद व ग्लूकोमा का खतरा बढ़ जाता है। यदि आपको आखों या पलकों में सूजन, आँखे लाल हो रही, दोहरी दृष्टि पढ़ रही, घुघली दृष्टि दिखे, तथा तेज प्रकाश आँखो में चुभता है, इसतरह के परिवर्तन दिखाई दे तो डाक्टर से परामर्श अवश्य लेवे ।
आँखों में होने वाली कोई भी दिक्कत अगर लंबे समय तक बनी रहती है, तो गंभीर समझ कर इलाज करवाना आवश्यक है। खुद ही दवा या आई ड्रॉप का उपयोग नहीं करें। ये हानिकारक है। आँखो की थोड़ी सी असावधानी इसकी नाजुक माँसपेशियों को गंभीर क्षति पहुंचा सकती है। इससे आप अंधेपन के भी शिकार हो सकते हैं। अतः इस नाजुक अंग को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है।
डॉ. बी.आर.नलवाया, मंदसौर, (मप्र) 9826769449
With Regards,
Dr. B. R. Nalwaya
Ex.Professor cum HOD
Department of Commerce,
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