मेटा का बड़ा फैसला: बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे सुरक्षा एजेंसियों को देगा, सरकार से बातचीत के बाद बनी सहमति
नई दिल्ली:
सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा (Meta)—जो फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप जैसी लोकप्रिय सेवाओं का संचालन करती है—बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। भारत सरकार के साथ लंबी बातचीत और कड़े रुख के बाद मेटा अब बच्चों से जुड़े यौन शोषण (Child Sexual Abuse Material – CSAM) के मामलों की जानकारी सीधे देश की चाइल्ड सेफ्टी और जांच एजेंसियों को रिपोर्ट करने के लिए राजी हो गई है।
सरकार के दबाव के बाद बनी सहमति
सूत्रों के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई कई दौर की बैठकों के बाद मेटा ने इस पर सहमति जताई है। इससे पहले सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को साफ चेतावनी दी थी कि अगर उनके प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण या अश्लील कंटेंट को तुरंत नहीं हटाया गया और इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्हें कानूनी परिणामों (IT एक्ट के तहत मिलने वाली छूट खत्म होने) का सामना करना पड़ेगा।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
- त्वरित रिपोर्टिंग: जैसे ही मेटा के ऑटोमेटेड सिस्टम या यूजर रिपोर्टिंग के जरिए किसी चाइल्ड एब्यूज कंटेंट की पहचान होगी, उसकी जानकारी तुरंत संबंधित जांच एजेंसियों (जैसे NCRB या साइबर सेल) को भेजी जाएगी।
- अकाउंट्स पर कड़ा एक्शन: ऐसे मामलों में शामिल यूज़र्स के अकाउंट्स को तुरंत ब्लॉक किया जाएगा और उनका डेटा सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा ताकि अपराधियों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सके।
- डेटा शेयरिंग और को-ऑर्डिनेशन: सरकार और मेटा मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं जिससे रिपोर्टिंग और कार्रवाई के बीच का समय (Response Time) बेहद कम हो जाए।
चाइल्ड सेफ्टी की दिशा में बड़ा कदम
इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर काम करने वाली संस्थाओं और सरकार ने मेटा के इस फैसले का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से साइबर क्रिमिनल्स और बच्चों का शोषण करने वाले नेटवर्क पर नकेल कसने में बड़ी मदद मिलेगी। सरकार का अगला लक्ष्य अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी इसी तरह के सख्त नियमों के दायरे में लाना है।
