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मध्य प्रदेश सरकार ने फिर लिया 2,400 करोड़ का कर्ज: 5 महीने में आंकड़ा 47,800 करोड़ पहुंचा, कुल देनदारी 5.36 लाख करोड़

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मध्य प्रदेश सरकार ने फिर लिया 2,400 करोड़ का कर्ज: 5 महीने में आंकड़ा 47,800 करोड़ पहुंचा, कुल देनदारी 5.36 लाख करोड़

गौरव जोशी

भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य के विकास कार्यों और जारी योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन के लिए एक बार फिर बाजार से ₹2,400 करोड़ का नया कर्ज लिया है। इस नए कर्ज के साथ ही चालू वित्त वर्ष के महज 5 महीनों में राज्य सरकार द्वारा लिए गए कुल कर्ज का आंकड़ा बढ़कर ₹47,800 करोड़ हो गया है। इसके चलते राज्य पर कुल आर्थिक देनदारी अब ₹5.36 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है।

वित्तीय वर्ष में कर्ज का बढ़ता ग्राफ
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य सरकार लगातार बुनियादी ढांचे के विकास, जारी जन कल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक व्यय को संतुलित करने के लिए आरबीआई (RBI) के माध्यम से बांड जारी कर बाजार से पूंजी जुटा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में हर महीने औसतन ₹9,000 करोड़ से अधिक का कर्ज लिया गया है।
लाडली बहना और फ्लैगशिप योजनाओं पर असर
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य पर बढ़ता वित्तीय बोझ और मासिक ब्याज का भुगतान आने वाले समय में बजट प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि लिया जा रहा यह कर्ज निर्धारित वित्तीय सीमाओं और एफआरबीएम (FRBM) एक्ट के दायरों के भीतर ही है, जिसका मुख्य उद्देश्य पूंजीगत संपत्तियों का निर्माण और जनहित की योजनाओं का निर्बाध संचालन सुनिश्चित करना है।
विपक्ष का हमला, सरकार की सफाई
बढ़ते कर्ज को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार बिना नए आय के स्रोत बनाए केवल कर्ज के सहारे व्यवस्था चला रही है, जिससे राज्य गहरे आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। वहीं, सत्ता पक्ष का तर्क है कि विकास की गति को बनाए रखने और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के लिए यह एक सामान्य वित्तीय प्रक्रिया है।

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