विशेष संवाददाता, भोपाल। मध्य प्रदेश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्य सचिव ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव ने सुशासन के दावों की जमीनी हकीकत पर तीखे सवाल खड़े किए। प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अब पुराने ढर्रे पर काम नहीं चलेगा।
‘अवैध खनन माफियाओं में खौफ क्यों नहीं?’ अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश देते हुए मुख्य सचिव ने कहा, “जनसुनवाई में लोग जहर खा रहे हैं, आत्मदाह कर रहे हैं। अवैध खनन करने वालों पर पुलिस-प्रशासन का कोई खौफ नहीं है। ऐसे कैसे कोई भी व्यक्ति किसी पर ट्रैक्टर या बाइक चढ़ा देने की हिम्मत कर सकता है? आखिर ये कैसा सुशासन है?”
उन्होंने दो टूक कहा कि इस तरह की घटनाएं शासन की छवि धूमिल करती हैं। ऐसी घटनाएं न हों, यह सुनिश्चित करना सीधे तौर पर कलेक्टर और एसपी की जिम्मेदारी है। ऐसा करने वालों पर सख्त से सख्त एक्शन लिया जाना चाहिए।
डीजीपी के सख्त निर्देश: ‘ड्रग फ्री जोन’ बनें स्कूल-कॉलेज इस बैठक में पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना ने भी पुलिस अधीक्षकों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास फैले ड्रग्स के जाल को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर उन्हें ‘ड्रग फ्री जोन’ बनाया जाए। डीजीपी ने सख्त हिदायत दी कि शांति भंग करने वाले और हुड़दंगियों से सख्ती से निपटें। साथ ही, पॉक्सो (POCSO) और विस्फोटक अधिनियम का उल्लंघन करने वालों को कतई न बख्शा जाए।
बैठक के अन्य कड़े फैसले और निर्देश:
- 104 हैंडपंपों पर कब्जा, हटाने के निर्देश: बैठक में जानकारी सामने आई कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में 104 सरकारी हैंडपंपों पर रसूखदारों और निजी लोगों ने कब्जा कर रखा है। मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स को तुरंत कब्जा हटाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
- दो कलेक्टर्स को फटकार: खेतों में नरवाई (पराली) जलाने के मामलों में रोकथाम न कर पाने और लापरवाही बरतने पर जबलपुर और नरसिंहपुर कलेक्टर्स को फटकार लगाई गई।
- खाद वितरण पर निर्देश: आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए निर्देश दिए गए कि किसानों को खाद के टोकन सिर्फ डीएपी (DAP) के लिए ही नहीं, बल्कि एनपीके (NPK) के लिए भी दिए जाएं, ताकि वितरण केंद्रों पर हंगामे की स्थिति न बने।
- पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा: हाल ही में हुए बरगी क्रूज हादसे से सबक लेते हुए सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं कि जिलों के सभी जलाशयों व पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता और सख्त इंतजाम किए जाएं।
कानून-व्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस शासन के इन कड़े तेवरों से यह संदेश साफ है कि फील्ड पर तैनात अधिकारियों (कलेक्टर-एसपी) को अब अपनी कार्यप्रणाली सुधारनी होगी। जनसुनवाई में आम आदमी की समस्याओं का त्वरित और संवेदनशील समाधान होना चाहिए, ताकि किसी को भी हताशा में चरम कदम उठाने पर मजबूर न होना पड़े।
