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इंदौर के खजराना में 7 करोड़ के आभूषणों से चमके गणपति, जानिए उज्जैन के चिंतामन में क्यों बन रहा ‘उल्टा स्वास्तिक’

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MP में गणेश उत्सव की धूम: खजराना में 7 करोड़ के आभूषणों से बप्पा का श्रृंगार, बड़ा गणपति में 101 KG का भोग और चिंतामन में उल्टा स्वास्तिक

इंदौर/उज्जैन: देश-दुनिया के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी गणेश चतुर्थी का पावन पर्व बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। प्रदेश के प्रमुख गणेश मंदिरों में बप्पा का अलौकिक और भव्य श्रृंगार किया गया है, जिसके दर्शन के लिए तड़के सुबह से ही लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश और बड़ा गणपति से लेकर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर तक, हर तरफ ‘गणपति बप्पा मोरया’ की गूंज है।

1. खजराना गणेश: 7 करोड़ के हीरे-जवाहरात से सजे ‘इंदौर के राजा’

इंदौर के विश्व प्रसिद्ध श्री खजराना गणेश मंदिर में बप्पा का राजसी स्वरूप में ऐतिहासिक श्रृंगार किया गया है। गणेश उत्सव के खास मौके पर भगवान गणेश को करीब 7 करोड़ रुपये मूल्य के सोने, चांदी, हीरे और नवरत्नों से जड़े आभूषण पहनाए गए हैं।

ब्रह्ममुहूर्त में विशेष अभिषेक के बाद बप्पा को हीरे जड़ित आंखें (नेत्र) धारण कराई गईं। इसके साथ ही भगवान को स्वर्ण मुकुट, स्वर्ण छत्र और स्वर्ण चंद्रिका अर्पित की गई। रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का भी विशेष स्वर्ण आभूषणों से श्रृंगार हुआ। उत्सव के पहले दिन खजराना गणेश को सवा लाख मोदक का महाभोग लगाया गया है। सुरक्षा के लिहाज से पूरे मंदिर परिसर में भारी पुलिस बल और CCTV कैमरों से निगरानी रखी जा रही है।

2. बड़ा गणपति: 25 फीट ऊंची प्रतिमा को 101 किलो का महाप्रसाद

बड़े गणपति इंदौर

इंदौर के ही ऐतिहासिक बड़ा गणपति मंदिर में भी भक्तों का तांता लगा हुआ है। अपनी 25 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा के लिए दुनिया भर में मशहूर बड़ा गणपति को गणेश चतुर्थी पर 101 किलोग्राम का विशाल मुख्य लड्डू अर्पित किया गया। भगवान का आकर्षक चोला बदला गया और विशेष आरती की गई। इस भव्य स्वरूप को निहारने के लिए इंदौर और आसपास के जिलों से हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

3. चिंतामन गणेश: मन्नत पूरी करने के लिए दीवार पर ‘उल्टा स्वास्तिक’

चिंतामन गणपति उज्जैन

उज्जैन के पौराणिक चिंतामन गणेश मंदिर में भी तड़के 4 बजे से ही दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। इस मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण जी और माता सीता ने यहाँ तीन विग्रहों (चिंतामन, इच्छामन और सिद्धिविनायक) की स्थापना की थी।

गणेशोत्सव के दौरान यहाँ एक अनोखी परंपरा देखने को मिल रही है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए मंदिर की पिछली दीवार पर गोबर या सिंदूर से उल्टा स्वास्तिक बना रहे हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से बप्पा हर चिंता दूर करते हैं और मन्नत पूरी होने के बाद भक्त दोबारा आकर यहाँ सीधा स्वास्तिक बनाते हैं।


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