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Madhypradesh 15 सालों में 73 फीसदी कम हुई निरक्षरता, मगर 50.75 लाख लोग अब भी अक्षर ज्ञान से दूर

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15 सालों में 73 फीसदी कम हुई निरक्षरता, मगर 50.75 लाख लोग अब भी अक्षर ज्ञान से दूर

भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षा और साक्षरता के प्रसार को लेकर बीते डेढ़ दशक में जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण और राज्य शिक्षा केंद्र की हालिया विभागीय समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में निरक्षरता के ग्राफ में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों से तुलना करें तो पिछले 15 वर्षों में राज्य के भीतर निरक्षरता की दर में करीब 73 प्रतिशत की भारी कमी आई है। हालांकि, इस उल्लेखनीय प्रगति के बीच एक बड़ी प्रशासनिक और सामाजिक चुनौती यह भी खड़ी है कि प्रदेश में अब भी 50 लाख 75 हजार से अधिक लोग बुनियादी अक्षर ज्ञान की पहुंच से पूरी तरह दूर हैं।

डेढ़ दशक में 1.38 करोड़ से अधिक लोग साक्षरता के दायरे में आए

विभागीय आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि विभिन्न सरकारी अभियानों और निरंतर प्रयासों के चलते पिछले 15 सालों में राज्य के भीतर साक्षरता का स्तर तेजी से सुधरा है। साल 2011 में प्रदेश के भीतर निरक्षरों की संख्या काफी बड़ी थी, लेकिन शासन के नीतिगत प्रयासों और साक्षरता दूतों की मेहनत से बीते 15 वर्षों में करीब 1 करोड़ 38 लाख 90 हजार से अधिक लोग निरक्षरता के चक्रव्यूह से बाहर आने में सफल रहे हैं। इसी बड़ी सफलता के परिणामस्वरूप अब राज्य में निरक्षरों की कुल संख्या सिमटकर 50 लाख 75 हजार 33 रह गई है।

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साक्षरता का क्षेत्रीय असंतुलन: जबलपुर सबसे आगे, आलीराजपुर में काम बाकी

साक्षरता के इन ताजा आंकड़ों में मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के बीच का अंतर भी साफ नजर आता है। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश का जबलपुर जिला 81.07 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ पूरे सूबे में शीर्ष पायदान पर बना हुआ है। इसके विपरीत, राज्य के सुदूर आदिवासी बहुल अंचलों—विशेष रूप से आलीराजपुर, झाबुआ और बड़वानी जिलों में साक्षरता की स्थिति अब भी काफी कमजोर है। इन पिछड़े जिलों में साक्षरता के स्तर को उठाने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा विशेष कार्ययोजना के तहत अतिरिक्त फोकस के साथ काम करने की आवश्यकता जताई गई है।

बड़े शहरों में वयस्क निरक्षरों को केंद्रों तक लाना सबसे टेढ़ी खीर

इस रिपोर्ट में एक अहम व्यावहारिक और प्रशासनिक चुनौती का भी जिक्र किया गया है। सर्वे में यह पाया गया है कि भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे बड़े महानगरों में मजबूत शैक्षणिक इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्याप्त स्कूल और बेहतरीन संसाधन मौजूद होने के बावजूद, वयस्क निरक्षरों (Adult Learners) को चिन्हित करना और उन्हें साक्षरता केंद्रों तक पढ़ाई के लिए लाना एक जटिल कार्य साबित हो रहा है। उदाहरण के लिए, राजधानी भोपाल के शहरी व अर्ध-शहरी इलाकों में वयस्क साक्षरता अभियान के तहत निर्धारित किए गए लक्ष्यों का महज एक छोटा हिस्सा ही हासिल किया जा सका है। आजीविका की व्यस्तता और सामाजिक झिझक के चलते वयस्क शिक्षार्थियों को कक्षाओं से नियमित जोड़ना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

‘उल्लास’ नव भारत साक्षरता कार्यक्रम से शत-प्रतिशत का संकल्प

राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, सरकार का पूरा ध्यान अब उन छूटे हुए 50.75 लाख लोगों को जल्द से जल्द बुनियादी अक्षर ज्ञान और अंकगणित सिखाने पर केंद्रित है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त समन्वय से संचालित हो रहे ‘उल्लास’ (ULLAS – Understanding of Lifelong Learning for All in Society) नव भारत साक्षरता कार्यक्रम की रफ्तार को मैदानी स्तर पर तेज किया जा रहा है। इस विशेष अभियान के तहत स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों को “अक्षर साथी” के रूप में जिम्मेदारी दी जा रही है ताकि वे अपने आस-पास के निरक्षर वयस्कों को बुनियादी पढ़ना-लिखना सिखा सकें। शासन का अंतिम संकल्प इस योजना के जरिए मध्य प्रदेश को पूर्ण साक्षर राज्य की श्रेणी में खड़ा करना है।


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