करोड़ का कंप्यूटर खरीदी घोटाला; EOW ने 4 लोगों पर दर्ज की FIR, जानें कैसे हुआ फर्जीवाड़ा
भोपाल:
मध्य प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग (Social Justice and Empowerment of Persons with Disabilities Department) में सरकारी पैसों के दुरुपयोग और धोखाधड़ी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। राज्य की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के जरिए हुए करीब ₹10.99 करोड़ के कंप्यूटर और आईटी उपकरणों की खरीदी में बड़े घोटाले का भंडाफोड़ किया है।
इस मामले में EOW ने शुरुआती जांच के बाद 4 आरोपियों और उनकी फर्मों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत नामजद FIR दर्ज कर ली है।
GeM पोर्टल पर ऐसे रचा गया ‘फर्जी कॉम्पिटिशन’ का खेल
EOW के डायरेक्टर जनरल (DG) उपेंद्र जैन के मुताबिक, जांच में सामने आया कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने वाली चार अलग-अलग कंपनियों का नियंत्रण असल में एक ही व्यक्ति के हाथ में था। इन कंपनियों ने GeM पोर्टल पर टेंडर डालते समय:
- एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया।
- एक ही ईमेल आईडी और रजिस्टर्ड पता साझा किया।
- यहाँ तक कि उनका GST अकाउंट भी समान पाया गया।
यह सब इसलिए किया गया ताकि सरकार को यह दिखाया जा सके कि टेंडर में अलग-अलग कंपनियों के बीच मुकाबला (Competition) चल रहा है, जबकि अंदरखाने सब एक ही थे।
‘जुलाई में लगाए पुराने कंप्यूटरों को सितंबर में नया बता दिया’
घोटाले की परतों को खोलते हुए EOW ने बताया कि इन सप्लायर्स ने विभाग को पुराने और घटिया क्वालिटी के कंप्यूटर नए बताकर सप्लाई कर दिए। जांच रिपोर्ट के अनुसार, एक मामले में जो कंप्यूटर 22 जुलाई 2024 को पहले ही इंस्टॉल किए जा चुके थे, उन्हें 23 सितंबर 2024 को निकाले गए टेंडर में “बिल्कुल नया उपकरण” (New Equipment) दिखाकर सरकार से करोड़ों रुपये वसूल लिए गए।
इतना ही नहीं, कंप्यूटरों के तकनीकी स्पेसिफिकेशन (Specifications) में भी भारी हेरफेर की गई। कंपनी ने निर्धारित मानकों को ताक पर रखकर स्थानीय बाजार (Local Market) से खरीदे गए सस्ते SSD और RAM कंप्यूटरों में फिट कर दिए। साथ ही, टेंडर हासिल करने के लिए एक नामी मल्टीनेशनल कंप्यूटर निर्माता कंपनी का फर्जी ऑथराइजेशन लेटर (Fake Authorization Letter) भी जमा किया गया था।
₹3,754 का UPS विभाग को ₹11,247 में बेचा!
इस घोटाले में पावर बैकअप (UPS) की खरीदी में भी सीधे तौर पर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। EOW की जांच में सामने आया कि:
- जिस UPS मॉडल की बाजार में वास्तविक प्रिंटेड कीमत (MRP) ₹6,086 थी,
- और जो सरकारी GeM पोर्टल पर महज ₹3,754 में उपलब्ध था,
- उसे विभाग के लिए ₹11,247 प्रति UPS की अत्यधिक महंगी दर पर खरीदा गया।
हैरानी की बात यह है कि जब EOW ने संबंधित निर्माता कंपनी से संपर्क किया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि टेंडर में जिस मॉडल के UPS का उल्लेख किया गया था, उन्होंने उसकी सप्लाई ही नहीं की थी। यानी कागजों पर मॉडल कुछ और था और असल में कुछ और ही खपा दिया गया।
कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश
इस महाघोटाले के उजागर होने के बाद EOW ने सख्त रुख अपनाते हुए अनियमितताओं में शामिल सभी चारों फर्मों को ब्लैकलिस्ट (Blacklist) करने की सिफारिश सरकार से की है। मामले में नामजद चारों आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया गया है और विभाग के उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है जिन्होंने आंखें मूंदकर इन बिलों को पास किया था।
