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MP Nursing Council Scam: माता-पिता का नाम ‘डंकी’ और फोटो गधे की… बिना जांच के जारी हो गया नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट!

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मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था पहले से ही विभिन्न विवादों के कारण जांच के दायरे में रही है, लेकिन अब मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) की ऑनलाइन आवेदन और सत्यापन प्रणाली से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है जिसने विभागीय सुरक्षा और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। काउंसिल के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर एक गधे की तस्वीर और पूरी तरह से मनगढ़ंत जानकारियां अपलोड करके आवेदन किया गया, जिसे कंप्यूटर सिस्टम ने बिना किसी मैनुअल चेकिंग के स्वीकार कर लिया और डिजिटल हस्ताक्षर युक्त आधिकारिक नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इस सनसनखेज खुलासे के बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।

फॉर्म में लिखा- नाम ‘डंकी’ और जाति ‘एनिमल‘

दरअसल, यह पूरा मामला ऑनलाइन पंजीयन प्रणाली की खामियों और लचर सुरक्षा व्यवस्था का परीक्षण करने के लिए किए गए एक स्टिंग टेस्ट के दौरान सामने आया। छात्र संगठन NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने काउंसिल की वेबसाइट की हकीकत जांचने के लिए एक बेहद अजीबोगरीब आवेदन सबमिट किया था। इस आवेदन पत्र में दर्ज की गई जानकारियां इस प्रकार थीं:

  • अभ्यर्थी का नाम: डंकी (Donkey)
  • पिता का नाम: डंकी फादर
  • माता का नाम: डंकी मदर
  • जाति (Caste): एनिमल (Animal)
  • तस्वीर: इंसानी चेहरे की जगह एक गधे की फोटो लगाई गई।

हैरानी की बात यह रही कि शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों के स्थान पर भी महज दो बिल्कुल सादे (ब्लैंक) पन्ने स्कैन करके अपलोड कर दिए गए थे।

फीस जमा होते ही 5 मिनट में डिजिटल सर्टिफिकेट तैयार

सत्यापन प्रणाली की पोल तब खुली जब इस पूरी तरह से फर्जी फॉर्म के साथ निर्धारित शुल्क (करीब ₹2050) का ऑनलाइन भुगतान किया गया। फीस जमा होने के महज 5 मिनट के भीतर ही सिस्टम ने ऑटोमैटिक प्रक्रिया के तहत बिना किसी कॉलेज वेरिफिकेशन या कॉलेज रिकॉर्ड मिलान के रजिस्ट्रेशन नंबर जनरेट कर दिया। जारी किए गए इस डिजिटल प्रमाण पत्र में बकायदा रजिस्ट्रार के डिजिटल सिग्नेचर भी मौजूद हैं और इस ‘डंकी’ नाम के आवेदक को भोपाल नर्सिंग कॉलेज से उत्तीर्ण बताकर सितंबर 2031 तक के लिए वैध नर्स और मिडवाइफ के रूप में पंजीकृत कर दिया गया।

डिप्टी सीएम और प्रमुख सचिव के नाम पर भी बने प्रमाण पत्र

सत्यापन की यह ढिलाई केवल यहीं तक सीमित नहीं रही। इस सिस्टम की कमजोरी को उजागर करने के लिए प्रदेश के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह के नाम और फोटो का उपयोग करके भी डमी आवेदन किए गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि उन बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों के नाम पर भी सिस्टम ने बिना किसी क्रॉस-वेरिफिकेशन के धड़ल्ले से फर्जी नर्सिंग सर्टिफिकेट जारी कर दिए।

काउंसिल ने हटाया लिंक, जांच के आदेश

इस गंभीर चूक का वीडियो और डेटा सामने आने के बाद छात्र संगठनों ने दोषियों के खिलाफ पुलिस में FIR दर्ज कराने और व्यवस्था की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग उठाई है। छात्रों का कहना है कि इस तरह की लचर व्यवस्था के कारण कोई भी बिना पढ़े या बिना डिग्री के नर्सिंग का फर्जी डिजिटल सर्टिफिकेट हासिल कर मरीजों की जान जोखिम में डाल सकता है।

मामला गरमाने पर नर्सिंग काउंसिल के प्रशासनिक अधिकारियों ने सफाई दी है कि यह पोर्टल द्वारा तुरंत जारी होने वाला केवल एक प्रोविजनल (अस्थायी) सर्टिफिकेट होता है, जिसका अंतिम सत्यापन बाद में किया जाता है। हालांकि, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए काउंसिल ने तत्काल कदम उठाते हुए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की लिंक को अपने पोर्टल से हटा दिया है और पूरे डेटा की स्क्रूटनी शुरू कर दी है। अधिकारियों का दावा है कि इस जांच में सामने आने वाले सभी फर्जी और संदिग्ध प्रमाण पत्रों को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाएगा।

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