भोपाल/जबलपुर:
मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग से जुड़े 70,000 से अधिक शिक्षकों के लिए एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह शिक्षकों की सैलरी और एरियर से जुड़े पुराने फैसले को तुरंत लागू करे। कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सरकार को अंतिम 4 सप्ताह का समय दिया है। इस फैसले के लागू होने से शिक्षकों के मासिक वेतन में 15,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक की बड़ी बढ़ोतरी होगी, जिसके साथ ही उन्हें पिछले 10 सालों का बकाया एरियर भी दिया जाएगा। अनुमान के मुताबिक, एरियर की यह राशि प्रति शिक्षक लगभग 7 से 8 लाख रुपये तक हो सकती है जो उन्हें 12 प्रतिशत ब्याज के साथ मिलेगी।
क्या है पूरा मामला और विवाद की वजह?
यह पूरा विवाद अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों को मिलने वाले छठे वेतनमान और उनकी वरिष्ठता की गणना से जुड़ा हुआ है। शिक्षकों की लंबे समय से मांग थी कि उनकी सेवा की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से की जानी चाहिए। नियमों के मुताबिक, इन शिक्षकों को 1 जनवरी 2006 से छठे वेतनमान का लाभ मिलना था, लेकिन सरकार ने उन्हें यह लाभ 1 जनवरी 2016 से देना शुरू किया था। इसके खिलाफ शिक्षकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ हाईकोर्ट ने पूर्व में ही शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए साल 2006 से लाभ देने और बकाया राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार को लगा झटका
हाईकोर्ट के इस आदेश को टालने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की इस याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद हाईकोर्ट का फैसला अंतिम और सर्वोपरि हो गया, जिससे सरकार के पास अब शिक्षकों को उनका हक देने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख
सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद भी जब राज्य सरकार ने आदेश का पालन करने में देरी की, तो शिक्षकों की तरफ से हाईकोर्ट में अदालत की अवमानना (Contempt of Court) की याचिका दायर की गई। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सरकारी पक्ष की दलीलों को सुनते हुए साफ कर दिया कि अब और समय नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने सरकार को आखिरी 4 सप्ताह की मोहलत देते हुए हर हाल में आदेश का पालन करने और रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस ऐतिहासिक फैसले के लागू होने से मध्य प्रदेश सरकार के खजाने पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आने वाला है, लेकिन पिछले कई वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे शिक्षकों के लिए यह एक बहुत बड़ी जीत है।
