Home देश रील का पता नहीं, पढ़ाई की रील सही चलनी चाहिए!” मेट्रो में...

रील का पता नहीं, पढ़ाई की रील सही चलनी चाहिए!” मेट्रो में पीएम मोदी ने जब छात्रों की ली चुटकी; SRCC के शताब्दी समारोह में तय किया ‘विकसित भारत’ का रोडमैप

0

नई दिल्ली:
देश की राजधानी में शनिवार की शाम (5 सितंबर 2026, शिक्षक दिवस) को एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक राजनीतिक नज़ारा देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक, श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। लेकिन इस वीआईपी कार्यक्रम की सबसे बड़ी सुर्ख़ी उसका आगाज़ रही। दिल्ली की व्यस्त सड़कों पर लगने वाले भारी-भरकम सुरक्षा काफिलों को दरकिनार करते हुए, प्रधानमंत्री हाथ में स्मार्ट कार्ड थामे आम नागरिकों की तरह दिल्ली मेट्रो के कोच में सवार हो गए।

https://ntvtime.com/wp-content/uploads/2026/09/VID-20260905-WA0004.mp4

मेट्रो कोच में खुला संवाद: जब हैरान रह गए युवा सह-यात्री

मेट्रो ट्रेन के भीतर जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी दाखिल हुए, रोज़ाना सफर करने वाले यात्रियों और कॉलेज जा रहे छात्रों के लिए अपनी आंखों पर यकीन करना मुश्किल हो गया। सुरक्षा घेरे की औपचारिकताओं को तोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी सीट के आसपास मौजूद स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्रों और आम नागरिकों के साथ बेहद सहज और अनौपचारिक बातचीत शुरू कर दी।

इस सफर के दौरान युवाओं का उत्साह चरम पर था। छात्रों ने तुरंत अपने स्मार्टफोन निकाल लिए और प्रधानमंत्री ने भी बेहद खुशमिज़ाज अंदाज़ में पोज़ देते हुए उनके साथ जमकर सेल्फी खिंचवाई। बच्चों से उनकी पढ़ाई, करियर के लक्ष्यों, आधुनिक दौर की तकनीकों और उनके रोजमर्रा के अनुभवों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने इस पूरे सफर को एक जीवंत संवाद में बदल दिया। मेट्रो कोच के भीतर की यह अनफ़िल्टर्ड ऊर्जा सोशल मीडिया पर चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है।

13 साल पुराना कनेक्शन: यादों का ‘फुल सर्कल’

यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक इतिहास के लिहाज से एक बड़े ‘फुल सर्कल’ (चक्र पूरा होने) जैसा था। आज से ठीक 13 साल पहले, यानी फरवरी 2013 में जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने इसी SRCC के गौरवशाली मंच से देश के युवाओं के सामने अपना प्रसिद्ध ‘ग्लास आधा भरा है’ वाला विज़न रखा था। उस समय के ऐतिहासिक भाषण को देश की राष्ट्रीय राजनीति में उनके आगमन और युवा वोटरों के साथ सीधे जुड़ाव का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जाता है। अब, एक दशक से अधिक समय के बाद, लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में उसी संस्थान के 100 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक मील के पत्थर पर मुख्य अतिथि बनकर लौटना, अपने आप में बेहद खास और संदेशात्मक रहा।

मेट्रो कोच में खुला संवाद: “पहचानने में कोई शक है क्या?”

मेट्रो ट्रेन के भीतर जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी दाखिल हुए, रोज़ाना सफर करने वाले यात्रियों और कॉलेज जा रहे छात्रों के लिए अपनी आंखों पर यकीन करना मुश्किल हो गया। सुरक्षा घेरे की औपचारिकताओं को तोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी सीट के आसपास मौजूद स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्रों और आम नागरिकों के साथ बेहद सहज और अनौपचारिक बातचीत शुरू कर दी।

जैसे ही वे कोच के भीतर पहुंचे, पहले कुछ सेकंड के लिए वहां सन्नाटा पसर गया। कॉलेज जा रहे छात्रों के एक ग्रुप में से एक छात्र ने हैरान होते हुए अपने दोस्त से धीरे से कहा, “अरे भाई देख, ये तो सच में पीएम मोदी हैं या उनका कोई हमशक्ल?” प्रधानमंत्री ने यह सुन लिया और बेहद हल्के-फुल्के अंदाज में मुस्कुराते हुए बोले, “पहचानने में कोई शक है क्या? पास आकर देख लो।” यह सुनते ही पूरे कोच में ठहाके गूंज उठे और सुरक्षा घेरे की औपचारिकताएं पल भर में टूट गईं।

युवाओं संग खिंचाई और रील्स पर चटपटी बातें

इस सफर के दौरान युवाओं का उत्साह चरम पर था। छात्रों ने तुरंत अपने स्मार्टफोन निकाल लिए और प्रधानमंत्री ने भी बेहद खुशमिज़ाज अंदाज़ में पोज़ देते हुए उनके साथ जमकर सेल्फी खिंचवाई। इस दौरान बातचीत के कुछ बेहद दिलचस्प पल सामने आए:

  • कोडिंग और चाय की लत: जब बगल की सीट पर बैठे एक छात्र ने बताया कि वह कंप्यूटर साइंस का छात्र है और रात-रात भर जागकर कोडिंग करता है, तो पीएम मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा- “कोडिंग तो ठीक है, लेकिन स्वास्थ्य का क्या? कहीं स्क्रीन देखते-देखते चाय की लत तो नहीं लगा ली?” छात्र ने हंसते हुए जवाब दिया, “सर, चाय ही तो हमारी लाइफलाइन है!”
  • पढ़ाई की रील सही चलनी चाहिए: एक छात्रा ने हिम्मत जुटाकर कहा, “सर, आपके साथ एक सोशल मीडिया रील बना सकते हैं क्या?” इस पर प्रधानमंत्री ने हंसते हुए कहा, “रील का तो पता नहीं, लेकिन तुम्हारी पढ़ाई की रील सही चलनी चाहिए। चलो, पहले एक अच्छी सी सेल्फी लेते हैं।”

बच्चों से उनकी पढ़ाई, करियर के लक्ष्यों और उनके रोजमर्रा के अनुभवों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने इस पूरे सफर को एक जीवंत संवाद में बदल दिया।

शताब्दी मंच से पीएम मोदी की 3 सबसे बड़ी बातें:

शाम को जब प्रधानमंत्री SRCC परिसर पहुंचे, तो कॉलेज प्रशासन और सैकड़ों छात्रों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका भव्य स्वागत किया। दीप प्रज्वलन और संस्थान द्वारा शताब्दी वर्षगांठ की स्मृति में विशेष मोमेंटो भेंट किए जाने के बाद प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित किया:

  • नौकरी ढूँढने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें: प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि आज का भारत वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। युवाओं को अब सिर्फ नौकरी पाने (Job Seekers) की पारंपरिक सोच से बाहर निकलना होगा। उन्होंने अपील की कि छात्र अपने विचारों, इनोवेशन और स्टार्टअप्स के दम पर देश में नए रोजगार पैदा करने वाले (Job Creators) बनें।
  • टेक्नोलॉजी और रिसर्च पर फोकस: उन्होंने पारंपरिक शिक्षा पद्धतियों से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कोडिंग, सेमीकंडक्टर और उच्च स्तरीय रिसर्च को अपनाने की वकालत की। उन्होंने साफ किया कि 21वीं सदी को पूरी तरह से भारत की सदी बनाने का दारोमदार आज की इस ‘जेन-जी’ (Gen-Z) पीढ़ी के कंधों पर है।
  • बदलता हुआ युवा भारत: अपनी पुरानी यादों को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 13 साल पहले के भारत और आज के भारत के युवाओं की सोच में जमीन-आसमान का अंतर है। आज का भारतीय युवा आत्मविश्वास से लबरेज है, वह दुनिया के सामने आंख मिलाकर बात करता है और किसी भी क्षेत्र में जोखिम लेने से बिल्कुल नहीं डरता।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर भी कॉलेज की इस गौरवशाली यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि SRCC ने अपनी स्थापना (1926) से लेकर अब तक के 100 वर्षों में न केवल अकादमिक स्तर पर देश का नाम ऊंचा किया है, बल्कि भारत के उद्योग जगत, व्यापार, नीति-निर्माण और सार्वजनिक जीवन को कई पीढ़ियों के बेहतरीन लीडर्स सौंपे हैं।


NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version