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PM विश्वकर्मा योजना के 3 साल: बिना गारंटी मिल रहा ₹3 लाख का लोन, जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया

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PM विश्वकर्मा योजना के 3 साल: बिना गारंटी मिल रहा ₹3 लाख का लोन, जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली / इंदौर:
मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ (PM Vishwakarma Yojana) को सफलतापूर्वक आगे बढ़ते हुए एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुकी है। स्वरोजगार को बढ़ावा देने और देश के पारंपरिक कारीगरों व शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार इस योजना के तहत बिना किसी गारंटी (Collateral-Free) के ₹3,00,000 (3 लाख रुपये) तक का लोन मुहैया करा रही है।

यदि आप भी बढ़ई, लोहार, सुनार, दर्जी या मोची जैसे पारंपरिक हुनर से जुड़े हैं, तो बेहद कम ब्याज दर पर इस लोन का लाभ उठाकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं या उसे बढ़ा सकते हैं। आइए जानते हैं योजना की बारीकियां और आवेदन का पूरा प्रोसेस।

दो चरणों में मिलता है लोन, ब्याज दर बेहद मामूली

पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत मिलने वाली 3 लाख रुपये की लोन राशि को सरकार दो किस्तों या चरणों में जारी करती है:

  • पहला चरण (First Tranche): व्यवसाय की शुरुआत या बुनियादी विस्तार के लिए पहली बार में ₹1,00,000 (1 लाख रुपये) का ऋण दिया जाता है, जिसे चुकाने के लिए 18 महीने का समय मिलता है।
  • दूसरा चरण (Second Tranche): पहला लोन समय पर चुकाने के बाद, बिजनेस को बड़ा रूप देने के लिए ₹2,00,000 (2 लाख रुपये) का अतिरिक्त लोन मिलता है। इसे चुकाने के लिए 30 महीने की अवधि दी जाती है।
  • रियायती ब्याज दर: इस लोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस पर बाजार की सामान्य दरों के विपरीत सिर्फ 5% सालाना का फिक्स्ड ब्याज लिया जाता है। बाकी की ब्याज राशि पर सरकार सब्सिडी देती है।

लोन के अलावा मिलने वाले अन्य बड़े लाभ

यह योजना केवल ऋण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाभार्थी को पूरी तरह व्यवसाय के अनुकूल तैयार करती है:

  1. मुफ्त कौशल प्रशिक्षण (Skill Training): कारीगरों को आधुनिक तरीकों से काम सिखाने के लिए 5 से 7 दिनों का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाता है।
  2. रोजाना ₹500 का स्टाइपेंड: ट्रेनिंग के दिनों में कारीगर का काम प्रभावित न हो, इसके लिए सरकार प्रतिदिन ₹500 का भत्ता (Stाइपेंड) देती है।
  3. टूलकिट के लिए ₹15,000: ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी होने पर आधुनिक औजार खरीदने के लिए सरकार की ओर से ₹15,000 का ई-वाउचर या डायरेक्ट कैश ट्रांसफर किया जाता है।
  4. विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और पहचान पत्र: सरकार द्वारा प्रमाणित पहचान पत्र दिया जाता है, जिससे बाजार में विश्वसनीयता बढ़ती है।

कौन कर सकता है आवेदन? (पात्रता)

योजना में कुल 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है, जिनमें मुख्य रूप से बढ़ई, नाव निर्माता, अस्त्रकार, लोहार, ताला बनाने वाले, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी/चटाई/झाड़ू बनाने वाले, गुड़िया और खिलौने निर्माता, नाई, मालाकार, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले शामिल हैं।

  • आयु सीमा: आवेदक की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए।
  • पारिवारिक सीमा: परिवार का केवल एक ही सदस्य (पति/पत्नी और अविवाहित बच्चे) इसका लाभ ले सकता है।
  • सरकारी सेवा: परिवार में कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए।

आवेदन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया (Application Process)

पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है:

  1. CSC केंद्र पर जाएं: आवेदक को अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या जन सेवा केंद्र पर जाना होगा।
  2. दस्तावेज और e-KYC: अपने साथ आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक पासबुक और राशन कार्ड लेकर जाएं। वहाँ बायोमेट्रिक (अंगूठे का निशान) के जरिए e-KYC प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
  3. पोर्टल पर पंजीकरण: सीएससी संचालक द्वारा भारत सरकार के आधिकारिक पीएम विश्वकर्मा पोर्टल पर आपका फॉर्म भरा जाएगा।
  4. सत्यापन (Verification): फॉर्म जमा होने के बाद ग्राम पंचायत/शहरी स्थानीय निकाय, जिला समिति और राज्य समिति द्वारा 3 स्तरों पर आपके काम का वेरिफिकेशन किया जाएगा।
  5. ट्रेनिंग और फंड रिलीज: वेरिफिकेशन सफल होने पर आपको ट्रेनिंग के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा, जिसके बाद टूलकिट राशि और लोन की प्रक्रिया शुरू होगी।

अधिक जानकारी और आधिकारिक दिशा-निर्देशों के लिए लाभार्थी सीधे भारत सरकार के आधिकारिक वेब पोर्टल pmvishwakarma.gov.in पर जा सकते हैं।


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