(विजय बंजारे की रिपोर्ट)
प्रभात पट्टन में इन दिनों जुए का अवैध कारोबार पूरी तरह हाईटेक और चाक-चौबंद सुरक्षा नेटवर्क के साथ धड़ल्ले से चल रहा है। प्रभात पट्टन के बीएलपी कॉलोनी से लेकर सुलेमान शाह दरगाह क्षेत्र तक जुआरियों ने पुलिस से बचने के लिए एक नया और बेहद शातिर पैटर्न (तरीका) अपना लिया है।
रात के घने अंधेरे में चलने वाले इस खेल को छिपाने के लिए बिजली की लाइटों के बजाय मोबाइल की टॉर्च, बैटरी वाली टॉर्च और रिचार्जेबल लाइट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुलेमान शाह दरगाह के आसपास के इलाकों में यह अवैध खेल पिछले कई महीनों से बेखौफ जारी है।
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जासूसों का हाईटेक नेटवर्क और तगड़ी सुरक्षा
इस अवैध कारोबार का मास्टरमाइंड बेहद शातिर दिमाग से काम कर रहा है। छापे की कार्रवाई से बचने के लिए उसने पूरे इलाके में जासूसों और खबरीबाजों की फौज तैनात कर रखी है:
- चप्पे-चप्पे पर पहरा: बीएलपी कॉलोनी से दरगाह की पहाड़ी तक हर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर गली-मोहल्लों और सड़कों पर करीब 10 से 11 जासूस तैनात रहते हैं।
- बड़ा कमीशन: इन खबरीबाजों को किसी भी अनजान गतिविधि की तुरंत सूचना देने के लिए रोजाना ₹500-₹500 की दिहाड़ी दी जाती है।
- पल भर में अलर्ट: जैसे ही इलाके में कोई संदिग्ध वाहन या पुलिस की हलचल दिखती है, ये जासूस तुरंत मुखिया तक ‘कोड वर्ड’ में संदेश पहुंचा देते हैं और पलक झपकते ही जुआ बंद कर दिया जाता है।
लोकेशन बदलना और गाड़ियों से एंट्री
पकड़े जाने के डर से ये लोग लगातार अपनी जगह बदलते रहते हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हर रात ठीक 11:00 बजे से यह पूरा खेल शुरू होता है। खेलने वाले खिलाड़ियों को बेहद गोपनीय तरीके से मोटरसाइकिल, कार या पैदल तय ठिकाने पर पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि रात 11:00 बजे अनजान लोगों की गाड़ियां अंदर जाती हैं और तड़के 1:30 से 2:00 बजे के बीच वापस लौटती हैं।
इस सुनियोजित खेल को देखकर अब स्थानीय जनता के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर यह सब पुलिस की नाक के नीचे उनकी साठगांठ से चल रहा है या फिर जुआ माफिया पुलिस की आंखों में खुलेआम धूल झोंक रहे हैं।
