नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने करोड़ों खाताधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। आगामी 1 अक्टूबर से बैंक अपने सेवा शुल्कों (Service Charges) में बड़ा संशोधन करने जा रहा है। नए नियमों के लागू होने के बाद यदि कोई ग्राहक तय सीमा से अधिक बार नकदी (कैश) निकालता है, तो उसे प्रति ट्रांजैक्शन अतिरिक्त शुल्क चुकाना होगा।
किन खाताधारकों पर पड़ेगा असर?
बैंक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह बदलाव मुख्य रूप से बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) यानी जीरो बैलेंस खाताधारकों के लिए किया गया है। वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और कम आय वर्ग के लोगों को बिना मिनिमम बैलेंस के बैंकिंग सुविधा देने के लिए यह खाता शुरू किया गया था।
महीने में सिर्फ 4 बार ही निकाल सकेंगे फ्री कैश
1 अक्टूबर से लागू होने वाले नए नियमों के तहत BSBD खाताधारकों को एक महीने में केवल 4 मुफ्त कैश विड्रॉल की अनुमति होगी। इन 4 फ्री ट्रांजैक्शन में निम्नलिखित सेवाएं शामिल होंगी:
SBI और अन्य बैंकों के एटीएम (ATM) से की गई नकद निकासी।
बैंक शाखा (ब्रांच) में विड्रॉल फॉर्म या चेक के जरिए निकाला गया कैश।
आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के माध्यम से किया गया नकद लेन-देन।
5वीं निकासी पर जेब पर पड़ेगा असर
यदि कोई ग्राहक महीने की सीमा समाप्त होने के बाद यानी 4 बार से अधिक नकदी निकालता है, तो बैंक 5वें ट्रांजैक्शन से ₹15 + GST प्रति ट्रांजैक्शन का सेवा शुल्क वसूलेगा।
डिजिटल ट्रांजैक्शन पर राहत जारी
बैंक प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों पर यह अतिरिक्त चार्ज केवल नकदी निकालने (कैश विड्रॉल) पर ही लागू होगा। ऑनलाइन बैंकिंग, UPI, NEFT और RTGS जैसे डिजिटल ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह से मुफ्त और बिना किसी सीमा के जारी रहेंगे।
बैंक ने अपने सभी खाताधारकों से अपील की है कि वे असुविधा और अतिरिक्त शुल्कों से बचने के लिए दैनिक लेन-देन में अधिक से अधिक डिजिटल बैंकिंग माध्यमों का इस्तेमाल करें।
