18 दिन में ₹18 बढ़ी शक्कर: त्योहारों से पहले महंगाई का झटका, जानिए क्यों चढ़े चीनी के दाम

विशेष रिपोर्ट: शक्कर की ‘कड़वाहट’ से फीकी पड़ी त्योहारों की मिठास, 18 दिन में 18 रुपये का ऐतिहासिक उछाल

आशीष जावड़ेकर
आगामी तीज-त्योहारों की आहट के बीच आम आदमी की रसोई पर महंगाई का एक नया और बड़ा प्रहार हुआ है। जिस शक्कर के बिना भारतीय परिवारों के त्योहारों, मिठाइयों और खुशी के पलों की कल्पना भी नहीं की जा सकती, वही शक्कर अब आम जनता के पसीने छुड़ा रही है। बीते महज 18 दिनों के भीतर शक्कर के खुदरा दामों में प्रति किलो 18 रुपये की अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देखते ही देखते 40-42 रुपये प्रति किलो बिकने वाली शक्कर अब 58 से 60 रुपये के आंकड़े को छू रही है। बाजार की इस अचानक हलचल ने न सिर्फ आम गृहिणियों के बजट का ढांचा बिगाड़ दिया है, बल्कि व्यापारिक गलियारों में भी हड़कंप मचा दिया है।
अचानक क्यों चढ़ा शक्कर का पारा?
बाजार के जानकारों और थोक कारोबारियों की मानें तो इस तेजी के पीछे केवल एक वजह नहीं, बल्कि कई परिस्थितियां एक साथ जिम्मेदार हैं:
गन्ने की पैदावार पर मौसम की मार: मुख्य उत्पादक राज्यों में इस बार असमान बारिश और मौसम के मिजाज ने गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया है, जिससे चीनी मिलों में उत्पादन घटने का सीधा अनुमान है।
सप्लाई चेन में रुकावट और एडवांस बुकिंग: त्योहारों के सीजन को देखते हुए बड़े कारोबारियों द्वारा अग्रिम खरीदारी की जा रही है, जिससे स्थानीय मंडियों में तुरंत उपलब्ध होने वाले माल की कमी (आर्टिफिशियल शॉर्टेज) दिखाई दे रही है।
मुनाफाखोरी की आशंका: खुदरा स्तर तक पहुंचते-पहुंचते बिचौलियों द्वारा दरों को मनमाने ढंग से बढ़ाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
मिठाई बाजार पर संकट, छोटे व्यापारियों की टूटी कमर
शक्कर की दरों में आई इस तेजी का सबसे पहला और सीधा असर मिठाई उद्योग पर पड़ रहा है। रक्षाबंधन, गणेशोत्सव और दुर्गापूजा जैसे बड़े अवसरों के लिए आर्डर ले चुके छोटे-बड़े हलवाई अब असमंजस में हैं।
” पुराने रेट के हिसाब से मिठाइयों के एडवांस ऑर्डर ले रखे हैं। अब अचानक शक्कर के दाम 18 रुपये बढ़ जाने से  लागत गणित पूरी तरह बिगड़ गया है। अगर मिठाइयों के दाम बढ़ाते हैं तो ग्राहक नाराज होते हैं, और अगर पुराने दाम पर बेचते हैं तो जेब से घाटा सहना पड़ेगा।”

दूसरी ओर, मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता यह है कि त्योहारों में मेहमाननवाजी और बच्चों के लिए पकवान बनाना अब बजट से बाहर होता जा रहा है।

अगर समय रहते खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए चीनी मिलों पर स्टॉक लिमिट लागू करने, जमाखोरी के खिलाफ छापेमारी करने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए सस्ते दामों पर शक्कर की उपलब्धता सुनिश्चित करने की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।
अगर यही रुख कायम रहा, तो इस बार त्योहारों की मिठास सिर्फ बाजार के विज्ञापनों तक सीमित रह जाएगी और आम आदमी की थाली से मिठास गायब रहेगी।

ntvtime

Recent Posts

Atomberg Technologies IPO: एतम्बर्ग का धमाका! सेबी के पास जमा किए कागजात, ₹450 करोड़ के फ्रेश शेयर से खुलेगी किस्मत; पढ़ें पूरी डिटेल

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में बंपर कमाई करने वाले निवेशकों के लिए…

16 minutes ago

22 August History in Hindi: आज ही के दिन हुई थी मद्रास की स्थापना, जानें 22 अगस्त का इतिहास और मुख्य घटनाएं

नई दिल्ली: 22 अगस्त का दिन भारतीय और वैश्विक इतिहास में एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान…

25 minutes ago

CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका पर हमला, स्कूल निरीक्षण के दौरान पथराव और हाथापाई

जयपुर: जयपुर के एक स्थानीय स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे नागरिक सुरक्षा मंच (CJP) के…

44 minutes ago

गुजरात पुलिस में 414 कर्मचारियों का तबादला

संवाददाता चिराग सोनी गुजरात पुलिस में 414 कर्मचारियों का तबादलागुजरात पुलिस में बड़ा फेरबदल, 414…

50 minutes ago

21 अगस्त, विश्व उद्यमिता विकास दिवस पर विशेष-

21 अगस्त, विश्व उद्यमिता विकास दिवस पर विशेष*विकसित भारत 2047 के लिए उद्यमिता विकास  की…

55 minutes ago

पश्चिमी कमान में अंगदान जागरूकता कार्यक्रम — जीवन को आगे बढ़ाने की पहल

पश्चिमी कमान में अंगदान जागरूकता कार्यक्रम — जीवन को आगे बढ़ाने की पहलमनोज शर्मा,चंडीगढ़ ‌।…

59 minutes ago