सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: EMI नहीं भरने पर बैंक या एजेंट जबरन नहीं छीन सकते आपकी गाड़ी
नई दिल्ली: देश में वाहन लोन (Vehicle Loan) लेने वाले करोड़ों ग्राहकों के हक में सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कोई ग्राहक किसी वजह से अपने वाहन की ईएमआई (EMI) समय पर नहीं भर पाता है, तो भी बैंक, फाइनेंस कंपनी या उनके रिकवरी एजेंट दादागिरी करके जबरन गाड़ी नहीं उठा सकते।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने ‘हरि दत्त शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले की सुनवाई करते हुए यह बड़ा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोन डिफॉल्ट होने की स्थिति में बैंकों को कर्ज वसूलने का अधिकार जरूर है, लेकिन इसके लिए उन्हें तय कानूनी प्रक्रिया और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
रात के 1 बजे जबरन उठाई थी गाड़ी, कंपनी पर लगा 10 लाख का जुर्माना
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश का है, जहां पीड़ित हरि दत्त शर्मा ने चोला फाइनेंस कंपनी से लोन लेकर एक कमर्शियल ट्रक खरीदा था। किस्त बाउंस होने पर कंपनी के रिकवरी एजेंटों ने रात के करीब 1 बजे बिना किसी पूर्व नोटिस के, ट्रक का स्टीयरिंग लॉक तोड़कर उसे जबरन जब्त कर लिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस कार्रवाई पर सख्त नाराजगी जताते हुए इसे पूरी तरह अवैध माना। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति से उसकी आजीविका का साधन (गाड़ी) इस तरह जबरन छीनना संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने फाइनेंस कंपनी को आदेश दिया कि वे तुरंत पीड़ित का लोन अकाउंट बंद करें, ट्रक बेचकर मिली 4.5 लाख रुपये की राशि 6% ब्याज के साथ लौटाएं और मानसिक प्रताड़ना व आजीविका के नुकसान के बदले ₹10 लाख का मुआवजा दें।
कागजों पर नहीं चलेंगे नियम, सुप्रीम कोर्ट ने RBI को दिए सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान चिंता जताते हुए कहा कि रिकवरी एजेंटों की गुंडागर्दी रोकने के लिए आरबीआई (RBI) ने नियम और गाइडलाइंस तो बहुत बनाई हैं, लेकिन वे जमीनी स्तर पर सिर्फ कागजों पर दिखाई देती हैं। कोर्ट ने रिजर्व बैंक को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे सभी कमर्शियल बैंकों और एनबीएफसी (NBFC) कंपनियों द्वारा इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करवाएं।
गाड़ी लोन वालों के क्या हैं कानूनी अधिकार?
अदालत के फैसले के अनुसार, यदि आपकी किस्त बाउंस होती है तो:
- बैंक या फाइनेंसर को वाहन जब्त करने से पहले ग्राहक को लिखित में कानूनी नोटिस देना जरूरी है।
- रिकवरी एजेंट आपको अजीब समय पर (जैसे देर रात या तड़के सुबह) परेशान नहीं कर सकते।
- वाहन को अपने कब्जे में लेने से पहले ग्राहक को बकाया चुकाने का उचित समय और अंतिम अवसर देना अनिवार्य है।
