क्रूड ऑयल $96 के पार: राष्ट्रपति ट्रंप के आक्रामक रुख और मध्य-पूर्व में बढ़ती सैन्य झड़पों के बीच दुनिया भर के शेयर बाजारों में मची भारी बिकवाली।
NTV TIME डेस्क, नई दिल्ली/इन्दौर:
वैश्विक भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) पर सख्त नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) और अमेरिकी नियंत्रण का दावा किए जाने के बाद वैश्विक बाजारों में तहलका मच गया है। इस बड़े घटनाक्रम के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है, जहां ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 1.6% से अधिक उछलकर $96.20 प्रति बैरल के पार जा पहुंचा है।
जमीनी हालात: सैन्य टकराव और बाजार पर चोट
यह ताजा संकट उस समय और गहरा गया जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित लारक द्वीप सहित ईरान के कई तटीय सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। ईरान की तरफ से भी इसके जवाब में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की खबरें हैं। दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य टकराव की इस आशंका ने दुनिया भर के निवेशकों को डरा दिया है, जिसका सीधा असर आज सुबह एशियाई शेयर बाजारों पर देखने को मिला:
- जापान का निकेई 225 (Nikkei 225): बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली के कारण 2.59% टूट गया।
- दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI): 2.48% की भारी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ।
- यूएस फ्यूचर्स: अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स में भी लगातार गिरावट देखी जा रही है।
“ईरान अब एक असफल देश”: डोनाल्ड ट्रंप
सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए बयानों में राष्ट्रपति ट्रंप ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने ईरान को एक ‘फैलिंग नेशन’ (असफल राष्ट्र) करार देते हुए कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह पंगु हो चुकी है और उसका तेल निर्यात ठप है।
दूसरी तरफ, ईरान ने भी घुटने टेकने से साफ इनकार कर दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बकीर कलीबाफ ने दोटूक चेतावनी देते हुए कहा है, “अगर दुश्मन हमारे तेल निर्यात को रोकने की कोशिश करेगा, तो फारस की खाड़ी और होर्मुज के रास्ते दुनिया का कोई भी देश तेल निर्यात नहीं कर पाएगा।”
भारत की चिंता: क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
पूरी दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले होर्मुज स्ट्रेट के तंग रास्ते से होकर गुजरता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक हिस्सा आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा भाग इसी रूट से आता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान का यह गतिरोध लंबा खिंचा और ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, तो भारतीय तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा। डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी और महंगे कच्चे तेल की वजह से आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आम जनता पर महंगाई की सीधी मार पड़ना तय है।
