Home मध्य प्रदेश UDISE+ Report: देश भर में कम हुए सरकारी स्कूल, आधे से ज्यादा...

UDISE+ Report: देश भर में कम हुए सरकारी स्कूल, आधे से ज्यादा गिरावट अकेले मध्य प्रदेश में

0

नई दिल्ली/भोपाल: देश के स्कूली शिक्षा ढांचे को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ताजा ‘यूडीआईएसई+’ (UDISE+) रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, बीते एक साल में देश भर में सरकारी स्कूलों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पूरे देश में जितने सरकारी स्कूल बंद या मर्ज (विलय) हुए हैं, उनमें से आधे से ज्यादा स्कूल अकेले मध्य प्रदेश के हैं।

आंकड़ों की जुबानी: देश में घटे 4,791 स्कूल, MP में 2,426 पर ताला
UDISE+ की रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में संचालित कुल स्कूलों की संख्या 14,71,473 से घटकर अब 14,66,682 रह गई है। इस तरह पूरे देश में कुल 4,791 स्कूल कम हुए हैं। इस गिरावट में अकेले मध्य प्रदेश का हिस्सा 50 फीसदी से अधिक है, जहां 2,426 सरकारी स्कूल कम हो गए हैं। रोजाना के औसत को देखें तो देश में हर दिन करीब 13 स्कूल कम हुए, जिनमें से 6 स्कूल अकेले मध्य प्रदेश में बंद या मर्ज किए गए।

बजट बढ़ा, लेकिन स्कूल घटे
यह गिरावट तब सामने आई है जब मध्य प्रदेश सरकार का स्कूल शिक्षा बजट लगातार बढ़ रहा है। राज्य का शिक्षा बजट बढ़कर करीब 36,730 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जिसमें पिछले तीन वर्षों में लगभग 9,000 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। भारी-भरकम बजट के बावजूद जमीनी स्तर पर सरकारी स्कूलों का नेटवर्क सिकुड़ना नीतिगत फैसलों पर सवाल खड़े कर रहा है।

स्कूल कम होने के मुख्य कारण:

  1. कम नामांकन (Low Enrolment): ग्रामीण और दूरदराज के कई सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या लगातार कम हो रही है, जिससे प्रशासनिक तौर पर उन्हें पास के बड़े स्कूलों में मर्ज कर दिया गया।
  2. संसाधनों का युक्तिकरण (Rationalisation): शिक्षकों की कमी को दूर करने और इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए ‘कम छात्र संख्या’ वाले स्कूलों का एकीकरण किया गया।
  3. जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाएं: रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में सैकड़ों स्कूल ऐसे थे जिनके पास पक्का या सुरक्षित भवन नहीं था, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से उन्हें बंद करना पड़ा।

अन्य राज्यों का हाल
मध्य प्रदेश के बाद स्कूलों के विलय और बंद होने के मामले में दक्षिण और पूर्वी राज्य आगे रहे:

  • तेलंगाना: 1,392 स्कूल कम हुए
  • पश्चिम बंगाल: 568 स्कूल बंद/मर्ज हुए
  • आंध्र प्रदेश: 474 स्कूल कम हुए
  • तमिलनाडु: 369 स्कूल कम हुए

ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों पर सीधा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी स्कूलों के इस तरह बंद होने या दूर के स्कूलों में विलय होने से सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के गरीब बच्चों को उठाना पड़ रहा है। स्कूल दूर होने के कारण विशेषकर छात्राओं के बीच ‘ड्रॉपआउट’ (पढ़ाई बीच में छोड़ना) का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

शिक्षा विभाग का इस पर कहना

“विभाग का उद्देश्य स्कूलों को बंद करना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। जिन स्कूलों में छात्र संख्या बेहद कम (शून्य से 10 के बीच) थी या जहां शिक्षक उपलब्ध नहीं थे, उन्हें नजदीकी बड़े ‘सीएम राइज’ (CM RISE) या सर्वसुविधायुक्त स्कूलों में मर्ज किया गया है ताकि बच्चों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सभी विषयों के शिक्षक मिल सकें।”

विपक्ष का हमला:

“सरकार एक तरफ बजट बढ़ाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ गरीब, ग्रामीण और आदिवासी बच्चों के स्कूलों को बंद कर रही है। स्कूल दूर होने की वजह से गांवों में लड़कियों का ड्रॉपआउट रेट (पढ़ाई छोड़ना) बढ़ेगा। यह नीतिगत विफलता है।”

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version