मयंक तिवारी अयोध्या (पूराकलंदर)
क्या हकीकत है पूराकलंदर थाने की सच्चाई का कि अपराध रुकने का नाम नहीं लेता
कही अंधविस्वास हकीकत तो नहीं एक SO हो एक जो आता है वही डिस्टर्ब हो जाता है
क्या है थाने के बैरक के सामने का सच क्या सच में मृत आत्मा भटक रही थाने पर SO समेत पूरे परिवार की जघन्य हत्या हुई थी थाने पर क्या वही कारण तो नहीं
वैसे तो भूत प्रेत जादू टोने का कोई वैधानिक या संवैधानिक प्रमाण नहीं है लेकिन एक बात तो सच है यदि भगवान की मान्यता है तो भूत की मान्यता कही न कही सच होगी
यदि सच है तो झूठ की मान्यता कही न कही सच होती
ऐसी मान्यता है कि बुजुर्गों से सुनने में आता है कि कालिया नाम का डकैत जिसे पुराकलंदर थाने के SO और अन्य टीम ने घेरकर मार दिया था जिसकी तेरहवीं में डकैत साथियों को खाने में चूड़िया दी गई फिर क्या था उसके साथियों ने मन बना लिया और थाने में घुसकर पहले SO के कमरे में पूरे परिवार की हत्या कर दी थी फिर SO के आने के बाद बैरक के सामने SO को काट कर हत्या कर दी गई थी
पूर्व से बंदी वैरिक के सामने एक घेरा बना हुआ था जिसे कोई भी SO कोई दरोगा डिस्टर्ब करने की हिम्मत न रखता था ऐसी मान्यता थी कि जिसने उस घेरे को डिस्टर्ब किया वह डिस्टर्ब हो गया जिसमें पूर्व थाना प्रभारी राम बोध सिंह जिसने उसका स्वरूप बदलने की कोशिश की तो SO का पैर टूट गया ऐसी बाते चर्चा में आयी फिर कई थाना प्रभारी राजेश चंद त्रिपाठी ,वकील सिंह यादव,दीपन सिंह , आदि को इन चर्चाओं से गुजरना पड़ा उसके बाद किसी की हिम्मत न हुई फिर थाना प्रभारी राजेश सिंह जिन्होंने वहां पर पिलर उठवाया न चाहते हुए बिना गलती लाइन हाजिर और जांच से गुजरना पड़ा वही तेज तर्रार थाना प्रभारी ने थाने की कायाकल्प बदलने की कोशिश की और उस कलंक से अछूते नहीं रह पाए फिर उसके बाद एक से बढ़कर एक थाना प्रभारी आए जो बिना कोई गलती बड़ी गलती के हादसों का शिकार हो गए
पूर्व थाना प्रभारी राजेश चंद्र जो घटना हुए SO के कमरे में बतौर SO के पद पर रह रहे थे एक बार चर्चा की उन्हें न जाने उस कमरे में अजीब सी फील होता है एक दिन का जिक्र करते हुआ बताए रात्रि के एक बजे मैं गस्त से आया कमरे में गया लाइट चली गई जब टॉर्च जलाकर देखा तो ऐसा लगा कि कोई गला कटा व्यक्ति सामने बैठा हो मै डर गया और दूसरे दिन कमरा बदल दिया हकीकत क्या भगवान जाने ऐसे मामले में दावे भी नहीं किये का सकते
फिर हादसों की झड़ी सी लग गई जो थाने की सुख शांति के लिए सुंदर कांड का आयोजन किया जा रहा तभी गोली चलने की सूचना ने माहौल खराब कर दिया आनन फानन में घायल का इलाज और धड़पकड़ शुरू कर दी गई
वही फिर थाना क्षेत्र का माहौल देख क्षेत्र की सुख शांति के लिए पूजा पाठ का आयोजन करने की बात हुई तो पूजा शुरू होने से पहले महिला आरक्षी फिसल कर गिर गई और फैक्चर हो गया वहीं शुरू होते ही गोली चलने की सूचना और मृत की सूचना मिलते ही पूरे थाने से लेकर अधिकारी तक को झझकोर दिया
फिर थाने में अनायास हो रहे एक से बढ़कर एक हादसे किसी की मृत्यु तो किसी की गलती न होते हुआ भी दुर्घटना
ये ऐसे दावे होते है जिसे कोई साबित नहीं कर सकता लेकिन कही न कही सोचने पर मजबूर कर देता है
आखिर क्यों कहते है ऐसे लोग आखिर क्या है सच्चाई अगर झूठे है दावे तो सच्चाई क्या सवाल ऐसा जो एक रहस्य बन गया है
यह न्यूज किसी अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देती है लेकिन जानना चाहती है आखिर सच क्या
