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UPI New Tax Rules: क्या अब Google Pay और PhonePe इस्तेमाल करने पर लगेगा चार्ज? संसद में पास हुआ नया बिल, जानिए पूरी सच्चाई

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UPI Transaction Charges New Rules 2026: भारत में डिजिटल भुगतान और यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के लिए देश की संसद से एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आ रही है। संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) द्वारा Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को पूरी तरह से पारित कर दिया गया है। इस नए बिल के पास होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है कि क्या अब गूगल पे (Google Pay), फोनपे (PhonePe) या पेटीएम (Paytm) से पैसे भेजने पर टैक्स या कोई अतिरिक्त चार्ज देना होगा?

चूंकि यह नया कानून सीधे तौर पर देश के करोड़ों नागरिकों की जेब और बैंकिंग से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे लेकर आम जनता के बीच कई तरह के भ्रम पैदा हो रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि संसद द्वारा पास किए गए इस नए बिल की पूरी सच्चाई क्या है और क्या वाकई आपका पसंदीदा फ्री यूपीआई अब महंगा होने जा रहा है।

क्या है संसद में पास हुआ नया ‘टैक्स बिल 2026’? (What is Taxation Bill 2026)

कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में एक बड़ा संशोधन किया गया है। अभी तक के पुराने नियमों के अनुसार, भारत में यूपीआई (UPI) और रुपे (RuPay) कार्ड के जरिए होने वाले डिजिटल लेन-देन पर किसी भी तरह का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी प्रोसेसिंग फीस लगाने पर कानूनी रोक थी। नया संशोधन इस सख्त प्रतिबंध को हटाता है और केंद्र सरकार को यह कानूनी अधिकार देता है कि वह भविष्य में जरूरत के अनुसार नोटिफिकेशन जारी कर यह तय कर सके कि कौन से इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट्स फ्री रहेंगे और किन पर शुल्क लगाया जा सकता है।

क्या अब UPI चलाने पर पैसे कटेंगे? वित्त मंत्री ने दिया जवाब

इस नए कानून के पास होने के बाद जब संसद में सवाल उठाए गए, तो देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया। वित्त मंत्री ने सदन में साफ-साफ आश्वासन दिया है कि “आम उपभोक्ताओं (Consumers) के लिए UPI ट्रांसफर पूरी तरह से मुफ्त रहेगा।” सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस बिल का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आज से ही यूपीआई पर कोई टैक्स या नया चार्ज लगा दिया गया है। भविष्य में यदि कोई शुल्क (MDR Charges) लगाने का फैसला किया भी जाता है, तो वह केवल बड़े मर्चेंट (व्यापारियों) के कमर्शियल ट्रांजैक्शन पर ही विचार किया जा सकता है, छोटे दुकानदारों या आम जनता पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

आम नागरिकों और छोटे दुकानदारों को डरने की जरूरत क्यों नहीं?

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और सरकार का मुख्य उद्देश्य भारत को एक कैशलेस

अर्थव्यवस्था बनाना है। ऐसे में यदि आम जनता के ₹10, ₹20 या ₹100 के रोज़मर्रा के लेन-देन पर कोई चार्ज लगाया जाता है, तो लोग वापस नकद की तरफ लौट सकते हैं, जिससे डिजिटल इंडिया मिशन को नुकसान होगा।


• पर्सन-टू-पर्सन (P2P): जब आप अपने किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को पैसे भेजते हैं, तो वह हमेशा की तरह 100% मुफ्त रहेगा


• छोटे व्यापारी (Small Merchants): चाय की दुकान, किराना स्टोर या सब्जी वाले के क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करके किए जाने वाले भुगतानों पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

संसद द्वारा पारित किया गया Taxation Amendment Bill, 2026 केवल सरकार को डिजिटल पेमेंट को नियंत्रित करने का कानूनी अधिकार देता है। सोशल मीडिया पर चल रही ‘UPI पर टैक्स लगने’ की खबरें पूरी तरह से अधूरी और भ्रामक हैं। आपका यूपीआई पेमेंट सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और फ्री है, इसलिए आप बिना किसी चिंता के अपनी पसंदीदा ऐप्स के जरिए लेन-देन जारी रख सकते हैं।

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