UPI का फ्री दौर खत्म: 15 अक्टूबर से लगेगा मर्चेंट चार्ज, PhonePe और Google Pay की चांदी; खुलेगा अरबों डॉलर की कमाई का रास्ता
नई दिल्ली: भारत का सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट नेटवर्क यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब अपने छह साल से चले आ रहे पूरी तरह मुफ्त (Zero-Fee) रहने के सफर को बदलने जा रहा है। पेमेंट रेगुलेटर्स द्वारा चुनिंदा UPI ट्रांजैक्शंस पर मर्चेंट फीस (Merchant Fees) लगाने की अनुमति मिलने के बाद डिजिटल पेमेंट सेक्टर में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। इस फैसले से बाजार की दो सबसे बड़ी कंपनियों—गूगल पे (Google Pay) और फोनपे (PhonePe) के लिए कमाई के अभूतपूर्व रास्ते खुल गए हैं, जिससे उनके बिजनेस मॉडल को सैकड़ों मिलियन डॉलर का सीधा बंपर फायदा होने की उम्मीद है।
मार्च 2028 तक $1.1 बिलियन का नया रेवेन्यू पूल
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन (Bernstein) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मर्चेंट फीस या मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने के बाद डिजिटल पेमेंट ऐप्स के लिए मार्च 2028 तक सालाना 1.1 बिलियन डॉलर (करीब ₹9,200 करोड़) का एक विशाल रेवेन्यू पूल तैयार होने का अनुमान है।
चूंकि भारतीय डिजिटल पेमेंट बाजार के करीब 80 प्रतिशत हिस्से पर वॉलमार्ट समर्थित PhonePe और अल्फाबेट के Google Pay का कब्जा है, इसलिए इस कुल कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब 900 मिलियन डॉलर (लगभग ₹7,500 करोड़) सालाना इन दोनों कंपनियों की झोली में जाने की उम्मीद है।
क्या है नया नियम और किस पर लगेगा चार्ज?
रेगुलेटर्स द्वारा जारी किए गए नए फ्रेमवर्क के तहत यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू हो रही है। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर शुल्क: नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई ग्राहक किसी मर्चेंट (कारोबारी या बिजनेस अकाउंट) को ₹2,000 से अधिक का यूपीआई पेमेंट करता है, तो उस पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा।
- अधिकतम सीमा तय: बहुत बड़े ट्रांजैक्शंस के लिए राहत देते हुए इस चार्ज को अधिकतम ₹300 पर कैप (Capped) किया गया है, जो ₹75,000 या उससे ऊपर के भुगतानों पर प्रभावी होगा।
- आम जनता और छोटे दुकानदार पूरी तरह सुरक्षित: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आम ग्राहकों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में पैसे भेजने पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। इसके साथ ही, छोटे दुकानदारों और ₹2,000 से कम के मर्चेंट भुगतानों को इस दायरे से बाहर (Exempt) रखा गया है।
पेमेंट ऐप्स के बिजनेस मॉडल को कैसे मिलेगा बूस्ट?
अभी तक यूपीआई इकोसिस्टम पूरी तरह फ्री होने के कारण इन फिनटेक दिग्गजों के लिए ऑपरेशनल खर्च निकालना और मुनाफे में आना एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। फोनपे के को-फाउंडर राहुल चारी ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि एमडीआर (MDR) की शुरुआत डिजिटल पेमेंट कंपनियों के भारी ऑपरेशनल कॉस्ट और लायबिलिटीज की भरपाई करने की दिशा में एक बेहद सकारात्मक कदम है। इस अतिरिक्त कमाई से इन कंपनियों को ग्रामीण भारत में अपनी सेवाओं का विस्तार करने और नई तकनीकों पर निवेश करने की वित्तीय ताकत मिलेगी।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल व्यावसायिक और आर्थिक समाचारों के विश्लेषण के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी वित्तीय लेनदेन या नीतिगत बदलावों की सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक बैंकिंग और एनपीसीआई (NPCI) गाइडलाइंस की पुष्टि स्वयं करें।)
