अमेरिका-कनाडा ट्रेड वॉर: अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को कहा ‘भौंकने वाला छोटा कुत्ता’, पीएम मार्क कार्नी का करारा पलटवार
वाशिंगटन / ओटावा:
अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहा व्यापारिक विवाद (Trade War) अब एक बेहद तीखे और व्यक्तिगत बयानों के दौर में पहुंच चुका है। अमेरिकी वित्त मंत्री (Treasury Secretary) स्कॉट बेसेंट ने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर तीखा हमला करते हुए कनाडा की तुलना ‘लगातार भौंकने वाले छोटे कुत्ते’ (Little yippy dog) से कर दी है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कनाडा के नए प्रधानमंत्री ने एक बेहतरीन व्यापार समझौते (Trade Deal) को सिर्फ अपनी घरेलू राजनीति के चक्कर में ठुकरा दिया, जिसके कारण अगस्त में हुई बातचीत पूरी तरह नाकाम हो गई थी।
दूसरी ओर, कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी मंत्री के इस अपमानजनक बयान पर करारा पलटवार किया है। कार्नी ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका ने समझौते के आखिरी पलों में ऐसी शर्तें थोप दी थीं जो कनाडाई उद्योगों को पूरी तरह तबाह कर देतीं, और कनाडा किसी भी ‘खराब समझौते’ पर दस्तखत नहीं करेगा।
अगस्त की नाकामी के बाद बढ़ा तनाव
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में यह ऐतिहासिक गिरावट अगस्त 2024 के अंत में आई:
- बातचीत का टूटना: अगस्त के आखिरी हफ्ते में दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच व्यापार समझौते को लेकर मैराथन बैठकें हुईं, जो बेनतीजा रहीं।
- अमेरिका के कड़े प्रतिबंध: बातचीत विफल होने के तुरंत बाद अमेरिका ने $20 अरब मूल्य के कनाडाई सामानों पर 50% का भारी टैरिफ लगा दिया। इसके साथ ही वाशिंगटन ने जनवरी 2027 से कनाडाई कारों और स्टील पर भी 50% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है।
- कनाडा का ‘आर्थिक युद्ध’ का ऐलान: पीएम मार्क कार्नी ने इसे कनाडा की अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला बताया है। कनाडा ने भी ईंट का जवाब पत्थर से देते हुए $20 अरब के अमेरिकी सामानों पर जवाबी टैरिफ (Retaliatory Tariffs) लगाने की घोषणा कर दी है, जो 8 सितंबर से प्रभावी होने जा रहे हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्री का तीखा हमला
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कनाडाई रुख की कड़ी आलोचना करते हुए कहा:
“कनाडा का रवैया एक ऐसे छोटे, भौंकने वाले कुत्ते की तरह हो गया है जो सिर्फ शोर मचाना जानता है। हमने उन्हें अब तक की सबसे बेहतरीन ट्रेड डील ऑफर की थी, जिसे किसी भी बड़े निर्यातक देश को नहीं दिया गया। लेकिन प्रधानमंत्री कार्नी जब से सत्ता में आए हैं, उनका रवैया पूरी तरह एंटी-अमेरिकन रहा है और उन्होंने कनाडाई जनता के हितों के बजाय अपनी राजनीति चमकाने के लिए इस डील को ठुकरा दिया।”
कनाडाई पीएम कार्नी का कड़ा जवाब
अमेरिकी मंत्री के इस बयान के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बेहद सख्त लहजे में अपनी संप्रभुता का बचाव किया:
- अमेरिका के अवांछित लोग हमारे एक्सपर्ट नहीं: कार्नी ने तंज कसते हुए कहा, “मैं नहीं मानता कि अमेरिका के नियुक्त किए गए और बिना चुनाव जीते आए कैबिनेट सदस्य कनाडाई राजनीति या यहां के हितों के एक्सपर्ट हैं।”
- उद्योगों की बलि नहीं चढ़ने देंगे: कार्नी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका चाहता था कि कनाडा अपना पूरा डेयरी और वाइन मार्केट अमेरिकी कंपनियों के लिए खोल दे, लेकिन बदले में वह कनाडाई लकड़ी और स्टील पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने को तैयार नहीं था।
- खराब डील मंजूर नहीं: पीएम ने दोहराया कि कनाडा बातचीत के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन वह किसी भी ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा जो कनाडाई ऑटोमोबाइल, स्टील और एल्युमिनियम सेक्टर को नुकसान पहुंचाए।
क्यों उलझे हैं दोनों देश?
- सुरक्षा और सीमा विवाद: अमेरिका का आरोप है कि कनाडा की उत्तरी सीमा से भारी मात्रा में ड्रग्स और अवैध घुसपैठिए अमेरिका में प्रवेश कर रहे हैं।
- 51वां राज्य का तंज: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पूर्व में कनाडा को मजाकिया लहजे में ‘अमेरिका का 51वां राज्य’ कहने से कनाडाई अधिकारियों और जनता में पहले से ही भारी नाराजगी है।
- बाजार पर कब्जा: अमेरिका कनाडा के संरक्षित डेयरी और कृषि क्षेत्रों में घुसना चाहता है, जिसका कनाडा के किसान कड़ा विरोध कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 8 सितंबर से कनाडा के जवाबी टैरिफ लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच यह आर्थिक युद्ध और अधिक आक्रामक रूप ले सकता है, जिससे दोनों देशों की सीमाओं पर व्यापार पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच जाएगा।
