( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर )
इंदौर में गणेश चतुर्थी पर भगवान को लगता है 108 किलो लड्डू का भोग, दर्शन मात्र से करते है सभी चिंताओं को दूर.
एनटीवी टाइम न्यूज इंदौर/मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा इंदौर में विराजमान है, जिसका दर्शन भक्त ऑनलाइन भी करते हैं. बताया जाता है कि इस प्रतिमा का स्वरूप पंडित नारायण दाधीच ने सपने में देखा था. जिसके बाद उन्होंने इसे मूर्त रूप दिया. इसके निर्माण में चूना, गोबर, रेत, मैथीदाना सहित सोने और चांदी का उपयोग किया गया है. भगवान गणेश की यह प्रतिमा 25 फीट ऊंची है और उन्हें चिंता हरण गणेश के नाम से जाना जाता है. माना जाता है कि भक्तों की हर चिंता को भगवान दूर करते हैं.

विदेशों से ऑनलाइन दर्शन करते हैं भक्त
इंदौर के ‘बड़ा गणपति मंदिर’ में 14 फीट चौड़ी चौकी पर 25 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा विराजमान है. यहां गणेश उत्सव पर भगवान को 108 किलो लड्डू का भोग लगता है. गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक गणेश जी के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है. इस दौरान लाखों भक्त प्रत्यक्ष रूप से भगवान के दर्शन करते हैं. इसके साथ ही मंदिर में ऑनलाइन दर्शन की भी सुविधा उपलब्ध है, जिसके माध्यम से देश-विदेश में मौजूद भक्त सीधे भगवान का दर्शन करते हैं.
प्रतिमा को बनाने में लगे थे 3 साल
बताया जाता है कि 1901 में स्व. पंडित नारायण दाधीच द्वारा इंदौर में मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी गणेश भगवान की प्रतिमा बनवाई गई थी. गणेश भगवान की प्रतिमा की जो आकृति है वह पंडित नारायण दाधीच को सपने में दिखी थी. वे गणेश जी के अनन्य भक्त थे और उन्होंने निश्चय किया कि इस आकृति को मूर्त रूप दूंगा. वे इस प्रयास में जुट गए और अपने स्वप्न के अनुसार विशालकाय मूर्ति की स्थापना की. इस प्रतिमा के निर्माण कार्य में करीब 3 साल का समय लगा.
प्रतिमा बनाने में तीर्थ स्थलों के जल का इस्तेमाल
बड़े गणपति मंदिर की गिनती एशिया के बड़े मंदिरों में की जाती है. यहां गणेश चतुर्थी के दौरान 10 दिन अलग-अलग तरह के कार्यक्रम आयोजित होते हैं. मंदिर में स्थापित प्रतिमा के निर्माण में चूना, गोबर, रेत, मैथीदाना, सोना, चांदी, लोहा आदि अष्ट धातु और नवरत्न का उपयोग किया गया है. इसके साथ ही सभी तीर्थ नदियों के जल का इस्तेमाल निर्माण कार्य में किया गया है.
साल में 4 बार चढ़ता है चोला
भगवान गणेश की इस विशालकाय प्रतिमा पर साल में 4 बार भाद्रपद सुदी चतुर्थी, कार्तिक बदी चतुर्थी, माघ बदी चतुर्थी और वैशाख बदी चतुर्थी पर चोला चढ़ाया जाता है. इस दौरान सवामन घी, सिन्दूर सहित अन्य श्रृंगार भी किए जाते हैं. इस कार्य में करीब 7 दिनों का समय लगता है. स्व. पंडित नारायण दाधीच की तीसरी पीढ़ी पंडित धनेश्वर दाधीच और चौथी पीढ़ी के पंडित राजेश, राकेश, प्रमोद, सचिन, आदित्य नारायण दाधीच गणेश जी के सेवा में लगे हैं.