Monday, May 25, 2026

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इबोला ने मचाई तबाही: ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित, कांगो में 20 दिन में 200 मौतें, भारत अलर्ट पर

सबहेडिंग:

  • डब्ल्यूएचओ ने उठाया कड़ा कदम, इबोला को बताया अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय
  • कांगो में कहर: स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई, मरने वालों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा
  • भारत में हाई अलर्ट: हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर कड़ी निगरानी, स्क्रीनिंग शुरू

रिपोर्टर (लोकेशन: नई दिल्ली):

दुनिया पर एक बार फिर जानलेवा वायरस का साया मंडरा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए इसे ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न’ (PHEIC) यानी वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। यह फैसला कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में हालात बेकाबू होने के बाद लिया गया है, जहां महज 20 दिनों के भीतर 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

कांगो में हाहाकार:

कांगो से आ रही तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं। वहां के स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। तेजी से फैलते संक्रमण ने वहां के बुनियादी ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया है। अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ है और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है। WHO की टीम जमीनी स्तर पर काम कर रही है, लेकिन वायरस के फैलने की रफ्तार चिंताजनक है।

भारत सरकार की तैयारी:

इबोला के इस भयानक रूप को देखते हुए भारत सरकार भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं।

  • स्क्रीनिंग: सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, खासकर अफ्रीका से आने वाली उड़ानों के यात्रियों की सख्त थर्मल स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है। बंदरगाहों पर भी इसी तरह की व्यवस्था की गई है।
  • क्वारंटाइन सुविधा: संदिग्ध मामलों के लिए विशेष क्वारंटाइन वार्ड और आइसोलेशन सेंटर तैयार रखे गए हैं।
  • दिशानिर्देश: अस्पतालों और मेडिकल स्टाफ को इबोला के लक्षण पहचानने और प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज करने के लिए नए दिशा-निर्देश (गाइडलाइंस) जारी किए गए हैं।

इबोला वायरस: क्या है और कैसे बचें?

इबोला एक गंभीर और अक्सर घातक बीमारी है। इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • तेज बुखार
  • तेज सिरदर्द
  • मांसपेशियों, जोड़ों में दर्द
  • गले में खराश
  • अत्यधिक कमजोरी
  • दस्त और उल्टी
  • कुछ मामलों में अंदरूनी और बाहरी रक्तस्राव

विशेषज्ञों की सलाह:

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों (खून, पसीना, उल्टी आदि) के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इसलिए, स्वच्छता बनाए रखना और किसी भी संदिग्ध मरीज से दूर रहना सबसे अच्छा बचाव है।

आगे का रास्ता:

ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित होने से अब इस वायरस से लड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। भारत सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे पैनिक न करें, लेकिन सावधानी जरूर बरतें। स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट और हेल्पलाइन पर लगातार अपडेट दिए जा रहे हैं।

(यह खबर लगातार अपडेट हो रही है, पल-पल की जानकारी के लिए जुड़े रहें…)

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