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ऐतिहासिक 15 अगस्त: लाल किले की प्राचीर पर गूंजा ‘वंदे मातरम’, 150 साल बाद बना यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड

ऐतिहासिक 15 अगस्त: लाल किले की प्राचीर पर गूंजा ‘वंदे मातरम’, राष्ट्रीय गीत के पूरे हुए 150 साल

नई दिल्ली: 15 अगस्त 2026 का यह स्वतंत्रता दिवस भारत के इतिहास में दो बेहद खास और गौरवशाली वजहों से दर्ज हो गया है। आज देश न केवल अपनी आजादी का जश्न मना रहा है, बल्कि देश की स्वतंत्रता के सबसे बड़े मंत्र रहे ‘वंदे मातरम’ गीत की रचना के 150 वर्ष भी पूरे हो चुके हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर पहली बार देश के मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले की प्राचीर से इस राष्ट्रीय गीत की गूंज सुनाई दी, जिसने हर भारतीय को राष्ट्रभक्ति से सराबोर कर दिया।

लाल किले पर पहली बार गूंजी राष्ट्रभक्ति की मूल प्रतिध्वनि

दशकों से लाल किले की प्राचीर पर राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ की धुन और गायन की परंपरा रही है। लेकिन इस साल, ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में एक अभूतपूर्व पहल की गई। पहली बार 15 अगस्त के मुख्य राजकीय समारोह में इस पावन गीत का आधिकारिक रूप से सस्वर गायन हुआ। लाल किले की ऐतिहासिक दीवारों से टकराती वंदे मातरम की लहरों ने वहां महसूस हर शख्स की आंखों को नम और सीने को गर्व से चौड़ा कर दिया।

150 वर्षों का गौरवशाली सफर: 1875 से 2026 तक

बंकिमचंद्र चटर्जी ने इस कालजयी गीत की रचना 7 नवंबर 1875 को की थी। आज वर्ष 2026 में इस गीत ने अपने सफर के डेढ़ सौ साल (150 वर्ष) पूरे कर लिए हैं।

इस गीत का इतिहास भारतीय चेतना के जागृत होने की कहानी है:

  • 1875: बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा संस्कृत और बांग्ला मिश्रित भाषा में रचना।
  • 1882: उनके विख्यात उपन्यास ‘आनंदमठ’ में इसका प्रकाशन, जिसके बाद यह जन-जन तक पहुंचा।
  • 1896: कलकत्ता के कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे गाकर राष्ट्रीय मंच दिया।
  • 1905: बंगाल विभाजन के विरोध में यह गीत ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ क्रांति का सबसे बड़ा हथियार बना।

गुलामी की जंजीरें तोड़ने वाला ‘क्रांति मंत्र’

एक दौर ऐसा था जब अंग्रेजी हुकूमत ‘वंदे मातरम’ के नारे से कांप उठती थी। ब्रिटिश सरकार ने इस गीत को गाने पर प्रतिबंध तक लगा दिया था, लेकिन यह पाबंदी क्रांतिकारियों के हौसलों को डिगा नहीं सकी। फांसी के फंदे को चूमने से लेकर लाठियां खाने तक, हर देशभक्त की जुबान पर बस एक ही नाम होता था—वंदे मातरम। यह महज एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता की मुक्ति का संकल्प बन चुका था।

संविधान सभा का सम्मान और आज का गौरव

24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की बैठक में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ऐतिहासिक घोषणा करते हुए ‘वंदे मातरम’ को भारत का राष्ट्रीय गीत (National Song) स्वीकार किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि इस गीत को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के बराबर का सम्मान और दर्जा हासिल होगा।

आज 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से इसका गायन कर देश ने बंकिमचंद्र चटर्जी और उन लाखों अमर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दी है, जिन्होंने इस मंत्र को गाते हुए देश पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। यह दिन यह याद दिलाता है कि भारत की रगों में दौड़ने वाली राष्ट्रभक्ति आज भी उतनी ही जीवंत और अटूट है।

जय हिंद! वंदे मातरम!


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