1999 में महज ₹6,000 की सैलरी पर हुई थी नौकरी की शुरुआत, विजिलेंस की छापेमारी में खुला काली कमाई का कुबेर खजाना
विशेष संवाददाता, भुवनेश्वर
ओडिशा में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक में विजिलेंस विभाग ने कंधमाल जिले के बालीगुडा में तैनात एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी (ITDA) के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बैकुंठ नाथ बेहरा के गुप्त साम्राज्य का भंडाफोड़ किया है। शनिवार को हुई इस ताबड़तोड़ छापेमारी में अधिकारी उस वक्त दंग रह गए, जब इंजीनियर की पत्नी के नाम पर मौजूद बैंक लॉकरों से ₹2 करोड़ से अधिक का अघोषित कैश बरामद हुआ।
शुरुआती जांच के अनुसार, बेहरा ने लगभग 27 साल पहले महज ₹6,000 प्रति माह की सैलरी पर अपनी सरकारी सेवा शुरू की थी। आज उनके पास भुवनेश्वर जैसे महंगे इलाकों में आलीशान बहुमंजिला इमारतें और करोड़ों के भूखंड मौजूद हैं।
अघोषित संपत्ति का ब्योरा: क्या-क्या हुआ बरामद?
विजिलेंस विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आरोपी इंजीनियर और उनके परिवार के पास से निम्नलिखित बेहिसाब संपत्तियां बरामद की गई हैं:
- लॉकर से ₹2.04 करोड़ कैश: भुवनेश्वर के चंद्रशेखरपुर स्थित एक्सिस बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में इंजीनियर की पत्नी के नाम संचालित दो लॉकरों को जब खोला गया, तो उसमें नोटों की गड्डियां ठूंस-ठूंस कर भरी थीं। बैंक मशीनों के जरिए कुल ₹2.04 करोड़ नकद की गिनती की गई। इसके अतिरिक्त ठिकानों से ₹2.66 लाख अलग से बरामद हुए हैं।
- 5 आलीशान बहुमंजिला इमारतें: भुवनेश्वर के पॉश इलाकों में बेहरा के चार आलीशान मकान मिले हैं। इनमें नीलाद्री विहार में लगभग 10,500 वर्ग फीट में फैली चार मंजिला इमारत, शैलश्री विहार में तीन मंजिला मकान, और पटिया व चंद्रशेखरपुर में दो-दो मंजिला मकान शामिल हैं। इसके अलावा जाजपुर के धर्मशाला (पैतृक गांव पंडुआ) में भी एक दो मंजिला मकान का पता चला है।
- 13 कीमती प्लॉट: विजिलेंस ने कुल 13 प्राइम लोकेशन वाले प्लॉट के दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें से 7 प्लॉट भुवनेश्वर के रिहायशी इलाकों में हैं, 5 जाजपुर के धर्मशाला में और 1 बारीपदा में स्थित है।
- सोना और बैंक डिपॉजिट: तलाशी के दौरान करीब 341 ग्राम सोने के आभूषण और अलग-अलग बैंकों में ₹45 लाख से अधिक के डिपॉजिट का भी पता चला है।
₹6,000 की नौकरी से ‘धनकुबेर’ बनने का सफर
विजिलेंस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी बैकुंठ नाथ बेहरा (52 वर्ष) ने 16 अगस्त, 1999 को नबरंगपुर जिले में एक जूनियर इंजीनियर (सिविल) के रूप में सरकारी नौकरी की शुरुआत की थी। उस समय उनका मासिक वेतन केवल ₹6,000 था। इस साल फरवरी में ही उन्हें प्रमोट कर असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बनाया गया था और कंधमाल के बालीगुडा स्थित ITDA में पोस्टिंग मिली थी, जहां उनका वर्तमान आधिकारिक वेतन करीब ₹80,000 प्रति माह था। इस सीमित आय के बावजूद करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने को लेकर विजिलेंस विभाग भी हैरान है।
9 ठिकानों पर एक साथ रेड, भारी अमला रहा तैनात
आय से अधिक संपत्ति की गुप्त सूचना के आधार पर स्पेशल कोर्ट (विजिलेंस) से सर्च वारंट हासिल कर इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। भुवनेश्वर, बारीपदा, जाजपुर और बालीगुडा सहित कुल 9 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस पूरी कार्रवाई को सुचारू रूप से चलाने के लिए विजिलेंस विभाग के 2 एडिशनल एसपी, 5 डीएसपी, 6 इंस्पेक्टर और भारी संख्या में सहायक पुलिस बल को तैनात किया गया था।
विजिलेंस अधिकारी का बयान:
“आरोपी इंजीनियर की अचल संपत्तियों और भूखंडों का सटीक मूल्यांकन करने के लिए विजिलेंस की तकनीकी शाखा (Technical Wing) काम कर रही है। फिलहाल जांच जारी है और बैंक खातों व अन्य निवेशों की भी कड़ियों को खंगाला जा रहा है। आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में कानून के मुताबिक सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
