( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर )
इंदौर में राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस के बीच सड़क पर विवाद, लग्जरी कार चोर गिरोह के आरोपी को लेकर मचा हाईवोल्टेज ड्रामा
एनटीवी टाइम न्यूज इंदौर/ लग्जरी कार चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के एक आरोपी को लेकर मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस आमने-सामने आ गई। आरोपी की गिरफ्तारी का श्रेय लेने और उसे अपने कब्जे में लेने को लेकर दोनों राज्यों की पुलिस के बीच इंदौर में सड़क पर विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ा कि लसूड़िया थाना पुलिस को हस्तक्षेप कर दोनों टीमों को थाने ले जाना पड़ा। करीब आठ घंटे तक चली इस रस्साकशी के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर मामला सुलझाया गया।
संयुक्त ऑपरेशन के बाद शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, लग्जरी कार चोरी करने वाले गिरोह की तलाश में मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस संयुक्त रूप से कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान राजस्थान के चित्तौड़गढ़ क्राइम ब्रांच ने गुजरात के अहमदाबाद से दीपक और सरफराज को हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई की जानकारी उज्जैन के नानाखेड़ा थाना पुलिस को नहीं दी गई।
इंदौर पहुंचते ही रोका काफिला
गुरुवार को चित्तौड़गढ़ पुलिस दोनों आरोपियों को तस्दीक के लिए इंदौर लेकर पहुंची। इस दौरान नानाखेड़ा थाना पुलिस को आरोपियों की लोकेशन मिल गई और उसने लसूड़िया क्षेत्र के एक ढाबे पर पुलिस वाहन को रोक लिया। नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने दावा किया कि आरोपी दीपक उनके थाने में दर्ज एक प्रकरण में भी वांछित है, इसलिए उसे उनके सुपुर्द किया जाए।
सड़क पर बहस, फिर थाने पहुंचा मामला
आरोपी की अभिरक्षा को लेकर दोनों पुलिस टीमों के बीच पहले बहस हुई, जो बाद में सड़क पर विवाद में बदल गई। स्थिति बिगड़ती देख लसूड़िया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने ले गई। बताया जा रहा है कि करीब आठ घंटे तक चली चर्चा के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ।
नेपाल में छिपे हैं गिरोह के सरगना
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि गिरोह के सरगना बाबी और मोनू हैं, जो अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद नेपाल भाग गए। आरोपियों ने इंदौर के अन्नपूर्णा, विजय नगर और लसूड़िया थाना क्षेत्रों से भी लग्जरी कारें चोरी करने की बात स्वीकार की है। इनमें विजय नगर क्षेत्र से हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश के रिश्तेदार की कार चोरी का मामला भी शामिल बताया जा रहा है।
हाईटेक तरीके से चुराते थे लग्जरी कारें
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देता था। आरोपी पहले कार में बैठकर कॉलोनियों की रेकी करते थे। इसके बाद दो सदस्य मौके पर उतरकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, लैपटॉप और विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से कुछ ही मिनटों में स्मार्ट लॉक खोल देते थे। गिरोह के सदस्य वायरलेस सिग्नल स्कैन कर डुप्लीकेट चाबी तैयार करने में भी माहिर बताए जा रहे हैं। चोरी के बाद वाहन को तय स्थान पर पहुंचाया जाता था, जबकि खरीदने और बेचने वाले अलग-अलग लोग होते थे।
