- ‘अंतिम संस्कार का निर्णय परिवार का निजी मामला, कानूनन दोबारा पोस्टमार्टम की जरूरत नहीं’ – कोर्ट का रुख
- नोएडा की रहने वाली मॉडल और पूर्व जज की बहू की मौत पर गहराया रहस्य; एम्स की रिपोर्ट में ‘डबल हैंगिंग मार्क’ और शरीर पर चोट के निशानों ने खड़े किए सवाल
- दहेज हत्या, जबरन गर्भपात और चरित्र हनन के आरोपों के बीच फंसी पुलिस जांच; आरोपी पति अब भी फरार
राजधानी भोपाल के बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में मृतका के परिवार को स्थानीय अदालत से बड़ा झटका लगा है। भोपाल जिला न्यायालय ने मृतका के शव का दोबारा स्वतंत्र पोस्टमार्टम कराने की परिजनों की याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। नोएडा की रहने वाली 33 वर्षीय ट्विशा (पूर्व मॉडल व एमबीए ग्रेजुएट) की शादी के महज पांच महीने बाद कटारा हिल्स स्थित उनके ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिवार ने साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रसूख के प्रभाव की आशंका जताते हुए एम्स दिल्ली में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की गुहार लगाई थी। कोर्ट ने इस मांग को ठुकराते हुए कहा कि पहली रिपोर्ट की वैधता और शव के अंतिम संस्कार को लेकर निर्णय लेना परिवार का अधिकार क्षेत्र है।
1. कोर्ट का फैसला और टिप्पणी
ट्विशा के परिजनों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए भोपाल के संबंधित मजिस्ट्रेट ने दोबारा पोस्टमार्टम कराने के आवेदन को नामंजूर कर दिया। कोर्ट का मानना था कि चूंकि एम्स (AIIMS) भोपाल के डॉक्टरों की टीम द्वारा पहले ही विस्तृत पोस्टमार्टम किया जा चुका है और शव के क्षत-विक्षत (Decompose) होने की स्थिति में दोबारा जांच का कोई मजबूत कानूनी आधार नहीं बनता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शव का अंतिम संस्कार करना या न करना पूरी तरह से परिवार का अधिकार है, लेकिन इसके लिए जांच को अनिश्चितकाल के लिए नहीं रोका जा सकता। इस फैसले से निराश पीड़ित परिवार ने अब इस आदेश के खिलाफ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है।
2. क्या है पूरा मामला? (Background of the Case)
मूल रूप से नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह के साथ हुई थी। समर्थ सिंह भोपाल की रिटायर्ड अतिरिक्त जिला जज (ADJ) गिरिबाला सिंह के बेटे हैं। शादी के महज पांच महीने बाद, बीते 12 मई 2026 की रात को ट्विशा का शव कटारा हिल्स स्थित उनके ससुराल में फंदे से लटका मिला था।
- आखिरी फोन कॉल: ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा (भारतीय सेना के अधिकारी) के अनुसार, घटना की रात 10:05 बजे ट्विशा ने अपनी मां को फोन कर ससुराल में हो रहे मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न की बात बताई थी। अचानक पति के कमरे में आने पर फोन कट गया। इसके बाद जब परिवार ने संपर्क करने की कोशिश की, तो कोई जवाब नहीं मिला। रात 10:20 बजे ससुराल पक्ष से खबर आई कि ट्विशा की सांसें थम चुकी हैं। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ (मृत अवस्था में लाया गया) घोषित कर दिया।
3. पोस्टमार्टम रिपोर्ट: सुसाइड या सोची-समझी हत्या?
एम्स भोपाल की प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।
- डबल हैंगिंग मार्क: रिपोर्ट के अनुसार, ट्विशा के गले पर दो समानांतर फंदे के निशान (Double Hanging Marks) पाए गए हैं, जो लगभग 2 सेमी चौड़े और ऊपर की ओर जाते हुए हैं। डॉक्टरों ने इसे ‘एंटे-मॉर्टम हैंगिंग’ (जीवित अवस्था में फंदा लगना) और दम घुटने को मौत का कारण बताया है।
- शरीर पर चोट के निशान: रिपोर्ट में मौत से पहले शरीर पर कई जगह हल्की चोटों और खरोंच के निशानों (Ante-mortem Injuries) का भी उल्लेख है।
- जबरन गर्भपात का सच: रिपोर्ट में यह भी पुष्टि हुई है कि मौत से ठीक एक सप्ताह पहले ट्विशा का मेडिकल गर्भपात (Miscarriage/Abortion) कराया गया था।
- जांच में लापरवाही: इस बीच एसआईटी (SIT) की जांच में पुलिस की गंभीर लापरवाही भी सामने आई है। शुरुआती दौर में जांच अधिकारी ने फांसी में इस्तेमाल की गई संदिग्ध ‘जिम्नास्टिक बेल्ट’ को पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों को मिलान के लिए नहीं भेजा था, जिसके बाद जिम्मेदार पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
4. परिवार के संगीन आरोप: ‘दहेज, प्रताड़ना और चरित्र हनन’
मेजर हर्षित शर्मा और पिता नवनिधि शर्मा का आरोप है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को फॉर्च्यूनर गाड़ी और 50 लाख रुपये दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। साथ ही, उसके पिता द्वारा दिए गए 20 लाख रुपये के शेयर्स और निवेश को भी अपने नाम ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जा रहा था। परिजनों का आरोप है कि गर्भवती होने पर ट्विशा के चरित्र पर कीचड़ उछाला गया और बच्चे के पितृत्व (Paternity) पर घिनौने सवाल उठाकर उसे जबरन गर्भपात के लिए मजबूर किया गया। परिवार का दावा है कि ससुराल पक्ष के न्यायिक रसूख के कारण जांच प्रभावित हो रही है।
5. ससुराल पक्ष का पलटवार और दावे
दूसरी तरफ, जमानत मिलने के बाद मीडिया के सामने आईं ट्विशा की सास व रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि ट्विशा मानसिक रूप से बीमार (Schizophrenic) थीं और ड्रग्स की आदी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्रग्स न मिलने के कारण वह अजीब व्यवहार करती थीं और इसी अवसाद के चलते उन्होंने यह कदम उठाया। हालांकि, पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती जांच और विसरा नमूनों में ड्रग्स के कोई निशान नहीं मिले हैं। ट्विशा के परिवार ने सास के इन बयानों को ‘चरित्र हनन’ की घिनौनी कोशिश करार दिया है।
6. पुलिस एक्शन और वर्तमान स्थिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल पुलिस कमिश्नर ने एक 6 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। पुलिस ने आरोपी पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज हत्या, दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में मामला दर्ज किया है।
- पति अब भी फरार: कोर्ट ने पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को पहले ही खारिज कर दिया है, जिसके बाद से वह लगातार फरार है। पुलिस ने उस पर इनाम भी घोषित किया है।
- सास को राहत: सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह को अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जिसका मृतका के परिवार ने विरोध किया है।


