( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर )
जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा बाबा प्रेमानंद महाराज पर की गई टिप्पणी से संत समाज की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. अब पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी बोले.
एनटीवी टाइम न्यूज/जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा बाबा प्रेमानंद महाराज को दिए गए चैलेंज को लेकर संत समाज अपने-अपने हिसाब से प्रतिक्रियाएं दे रहा है. अधिकांश संतों ने रामभद्राचार्य की टिप्पणी पर रोष जाहिर किया है. इसके बाद जगदगुरु ने अपनी सफाई पेश की. वहीं, इस मामले में प्रेमानंद महाराज या उनके भक्तों की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. अब बागेश्वर धाम के पं.धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस मामले में अपना पक्ष रखा.
बाबा बागेश्वर बोले- दोनों ही महान संत हैं
वृंदावन के प्रसिद्ध संत और प्रेमानंद महाराज और जगद्गुरू रामभद्राचार्य के बीच चल रहे विवाद को लेकिर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री का कहना है “दोनों ही महान संत हैं. जगद्गुरू रामभद्राचार्य के मन में किसी के लिए कोई ईर्ष्या नहीं ही. वह प्रेमानंद महाराज से स्नेह रखते हैं. जो लोग सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बयानबाजी करा के दो संतों को लड़ाना चाह रहे हैं, वह गलत है. दोनों वंदनीय हैं. तुलसी पीठाधीश्वर ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रेमानंद महाराज के लिए हमारे मन में किंचित मात्र भी ईर्ष्या नहीं है. वे हमारे लिए बालक रूप हैं. वो जब भी आएंगे, हम उन्हें गले लगाएंगे.”
मुंबई के भिवंडी में धीरेंद्र शास्त्री का कार्यक्रम
दरअसल, बाबा बागेश्वर इन दिनों महाराष्ट्र की यात्रा पर हैं. मुंबई के भिवंडी में स्थित बागेश्वर सनातन मठ में मंगलवार को गुरु दीक्षा के दौरान बागेश्वर धाम महाराज ने कहा “कुछ लोगों का काम है आग में घी डालना. दो साधुओं को भिड़ाकर लोग मजे लेना चाहते हैं. मैंने आज वह वीडियो देखा, मुझे बहुत बुरा लगा कि लोग कितना गलत फैला रहे हैं. हमारे गुरु रामभद्राचार्य महाराज जी मन में कुछ रखते नहीं हैं, बोल देते हैं, लेकिन महाराज के मन में कुछ गलत नहीं है. वह हम सभी लोगों से बहुत प्रेम करते हैं. वहीं, प्रेमानंद महाराज ने पूरे विश्व में भजन के प्रभाव से बहुत युवाओं को जोड़ने का कार्य किया.”

दो संतों को लड़ाकर मजा लेने वाले गलत हैं

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा “एक महापुरुष ने भागती, दौड़ती, बिछड़ती पीढ़ी को भजन से जोड़ा तो वहीं जगद्गुरु ने सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर रामलला के पक्ष में अपने बयान देकर राम मंदिर बनवाने में अहम भूमिका निभाई. हमारे गुरुजी तो कई बार हमसे भी कह देते हैं कि हम इस चमत्कार-वमतकार के चक्कर में नहीं पड़ते, हम तो बजरंगबली और रामजी के चक्कर में पड़ते हैं. उनके मन में भी किसी के लिए ईर्ष्या नहीं रही है. हां, वह बेबाक हैं, कह ज़रूर देते हैं. हमें दो महापुरुषों की बात सोशल मीडिया, मीडिया का विषय नहीं है. ये आदर का विषय है. दोनों की लड़ाई दिखाने से सनातन का ही नुकसान है.”