( संवाददाता प्रफुल्ल तंवर )
उज्जैन में देश के वीर सपूतों की रोज होती है आरती और पूजा. एक साथ 50 से अधिक जवानों की प्रतिमाएं विराजित. शहीदों को श्रद्धांजलि देने आते हैं लोग.
एनटीवी टाइम न्यूज उज्जैन/देश में वैसे तो कई देवी-देवताओं के हजारों मंदिर हैं लेकिन क्या कभी आप वीर शहीदों के मंदिर गए हैं. यदि नहीं तो आइए आज आपको वीर शहीदों के मंदिर लेकर चलते हैं. ये मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी किनारे बना है. प्राचीन शक्तिपीठि हरसिद्धि माता मंदिर के पीछे नरसिंह घाट के पास एक कमरे में वीर शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित हैं.
इसे लोग भारत सेवक मंदिर के नाम से जानते हैं. एक देश भक्त रिटायर्ड जज ने अपनी रिटायरमेंट की राशि से इस मंदिर को बनवाया है. रिटायर्ड जज के निधन के बाद मंदिर की देखरेख जामौद परिवार कर रहा है. यदि आप उज्जैन जाते हैं तो आप भी वीर शहीदों के इस मंदिर में पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं.
पहला मंदिर जहां देश के दोनों फील्ड मार्शल विराजित
वीर शहीदों के इस मंदिर में देश के फील्ड मार्शल और परमवीर चक्र से सम्मानित 21 जवानों की प्रतिमाएं स्थापित हैं. मंदिर में प्रवेश करते ही बाएं ओर फील्ड मार्शल रहे कोंडडेरा मडप्पा करिअप्पा, सैम मानेकशॉ, वायु सेना प्रमुख अर्जुन सिंह सहित 21 परमवीर चक्र सम्मानित वीर सपूतों की प्रतिमाएं देखने को मिलेंगी. वैसे तो 50 से अधिक वीर सपूतों और नारी शक्ति की प्रतिमाएं मंदिर में स्थापित हैं.


मंदिर में अमर किसान, अमर जवान, अमर विज्ञान की भी झलक आपको दिखेगी. इसके साथ ही कई महापुरुषों की प्रतिमाएं और तस्वीरें इस मंदिर में हैं. यहां राजपूत, सिक्ख, गोरखा, महार सहित कई रेजिमेंट के जवानों की तस्वीरें हैं.
रिटायर्ड जज ने बनवाया शहीदों का मंदिर
एक देश भक्त रिटायर्ड जज दान सिंह चौधरी ने अपनी रिटायरमेंट की राशि से एक छोटे से कमरे में यह मंदिर बनवाया था.साल 2016 में उनका निधन हो गया.उन्होंने अलीराजपुर निवासी अपने गुरु नरसिंहानंद महाराज की प्रेरणा से ये मंदिर उज्जैन में बनवाया था. उनके निधन के बाद इस मंदिर की देख रेख जामोद परिवार कर रहा है. सुबह-शाम यहां गुरु नरसिंहानंद की आरती होती है और शहीदों की पुण्यतिथि पर उनका पूजन. समय-समय पर मंदिर में भजन कीर्तन भी आयोजित किए जाते हैं.

रिटायरमेंट की राशि से बनवाया मंदिर’
रिटायर्ड जज के बेटे संजय कुमार चौधरी परिवार समेत उड़ीसा में रहते हैं. ईटीवी भारत से फोन पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि “पिता जज के पद पर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में अलग-अलग जिलों में पदस्थ रहे. साल 2008 में पिता दान सिंह चौधरी ने अपनी रिटायरमेंट की राशि से यह मंदिर बनवाया था. उन्होंने अलीराजपुर निवासी गुरु नरसिंहानंद महाराज की प्रेरणा से ये मंदिर उज्जैन में बनवाया. मंदिर की स्थापना परमानंद महाराज द्वारा की गई थी.”



उज्जैन में कहां है मंदिर?
मध्य प्रदेश के उज्जैन में प्राचीन शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर के पीछे नरसिंह घाट के पास क्षिप्रा नदी किनारे यह मंदिर है. एक 15/30 के कमरे में वीर शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं. मंदिर में प्रवेश करते ही भगवान के मंदिरों की तरह यहां घंटी लगी हुई है. मंदिर के बाहर लिखा है भारत सेवक मंदिर.


जामोद परिवार के सुपुर्द है मंदिर की देखभाल
संजय कुमार चौधरी ने बताया कि “साल 2016 में पिताजी और साल 2023 में माताजी का निधन हो गया. इसके बाद मंदिर की देख रेख जामोद परिवार के सुपुर्द की है. रूमा जामोद और सुरभ सिंह जामोद दोनों अपने बच्चों के साथ सुबह-शाम गुरु नरसिंहानंद के साथ शहीदों की आरती करते हैं. शहीदों की पुण्यतिथि पर उनका पूजन किया जाता है. मंदिर में भजन कीर्तन भी समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं.”
संजय कुमार चौधरी ने बताया “एक प्रतिमा की कीमत 40000 से 45000 के बीच है. ये प्रतिमाएं खास बनाना फाइबर से बनाई गई हैं.”
वीर सपूतों के सम्मान के लिए बनवाया मंदिर’
संजय कुमार चौधरी ने बताया कि “पिताजी का मंदिर स्थापना का उद्देश्य था कि आने वाली युवा पीढ़ी को वीर सपूतों के बारे में बता सकें. साथ ही आज जो चौराहों-चौराहों पर हम वीर सपूतों को पूजते हैं, कई बार वहां साफ-सफाई और अन्य तरह से ध्यान नहीं दे पाते तो उनका अपमान ना हो और वीर सपूतों को एक स्थान मिल सके यही उद्देश्य रहा.”
मंदिर में सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक निःशुल्क प्रवेश रहता है. जो भी राष्ट्रभक्त इस मंदिर में आता है उससे हम फीडबैक भी लेते हैं. जो जानकारी लोग देकर जाते हैं, मंदिर में उनके अनुसार व्यवस्थाएं जुटाने का हमारा प्रयास रहता है.