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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर मंदसौर में भारी बवाल, कांग्रेसी सड़कों पर उतरे

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मंदसौर: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद मंदसौर में भारी राजनीतिक घमासान मच गया है। नामांकन रद्द होने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं और जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। इस घटनाक्रम ने मंदसौर लोकसभा सीट पर चुनावी माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया है।

सांसद सुधीर गुप्ता का तंज

इस पूरे घटनाक्रम पर मौजूदा सांसद सुधीर गुप्ता ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मीनाक्षी नटराजन और कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, “खुद अपने हलफनामे में तथ्य छिपाए, नियमों का पालन नहीं किया और अब जब कानून अपना काम कर रहा है, तो संविधान की दुहाई दे रहे हैं। गलती खुद की है और आरोप दूसरों पर मढ़ रहे हैं।” सांसद का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आक्रामक है।

सड़कों पर उतरे कांग्रेसी, प्रशासन पर लगाए आरोप

मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होने की खबर मिलते ही मंदसौर में कांग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए। उन्होंने कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन पर सत्ता पक्ष के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह एक सोची-समझी साजिश है ताकि मीनाक्षी नटराजन को चुनाव लड़ने से रोका जा सके।

उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप करने और न्याय की गुहार लगाई है। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि नामांकन बहाल नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, निर्वाचन अधिकारी ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र में कुछ तकनीकी खामियों और आवश्यक दस्तावेजों/तथ्यों के अभाव का हवाला देते हुए उनका पर्चा खारिज कर दिया है। बताया जा रहा है कि हलफनामे में दी गई जानकारी और फॉर्म के कुछ कॉलम को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं, जिनका संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर यह कार्रवाई की गई।

आगे क्या?

इस फैसले के बाद मंदसौर का चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदल सकता है। कांग्रेस अब कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है और संभवत: इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी। इस बीच, शहर में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन मुस्तैद है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

निष्कर्ष

मीनाक्षी नटराजन जैसी कद्दावर नेता का चुनाव से पहले ही बाहर हो जाना कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस झटके से कैसे उबरती है और क्या कानूनी लड़ाई में उन्हें कोई राहत मिल पाती है या नहीं। इस पूरे घटनाक्रम ने मंदसौर के चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है।

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