डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। श्रावण (सावन) माह के पावन महीने में इस बार नाग पंचमी का त्योहार एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग में मनाया जा रहा है। इस वर्ष नाग पंचमी सावन के तीसरे सोमवार के दिन पड़ रही है। भगवान शिव और उनके आभूषण माने जाने वाले नाग देव की पूजा का यह दोहरा संयोग भक्तों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
माना जाता है कि सावन सोमवार के दिन नाग पंचमी पड़ने से शिवजी और नाग देव दोनों की कृपा एक साथ प्राप्त होती है। इस दिन विधि-विधान से नाग पूजन करने से जातक को कालसर्प दोष और सर्प भय से मुक्ति मिलती है।
नाग पंचमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है।
पंचमी तिथि प्रारंभ: 17 अगस्त 2026 (प्रातःकाल से)
पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: सुबह 05:55 बजे से सुबह 08:30 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:58 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: दिनभर विद्यमान
सावन सोमवार और नाग पंचमी का महासंयोग
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शिव पूजन और नाग पूजन का यह महासंयोग कई वर्षों बाद बन रहा है। सावन सोमवार का व्रत रखने वाले श्रद्धालु इस दिन जलाभिषेक के साथ-साथ नाग देव का दुग्धाभिषेक भी कर सकेंगे। मान्यता है कि इस दिन शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित करने से कुंडली के राहू-केतु दोष भी शांत होते हैं।
पूजा की सरल विधि
स्नान व संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।
शिव-नाग पूजन: पूजा स्थान पर नाग देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि घर के पास शिवलिंग हो, तो मंदिर जाएं।
अभिषेक: नाग देव और शिवलिंग पर कच्चा दूध, गंगाजल और जल अर्पित करें।
सामग्री अर्पित करें: हल्दी, रोली, अक्षत, फूल, बेलपत्र और शमी के पत्ते चढ़ाएं।
भोग: नाग देवता को भुने हुए चने, लावा (धान का लावा) और मिठाई का भोग लगाएं।
मंत्र जाप: ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्’ मंत्र का जाप करें।
नाग पंचमी पर क्या करें और क्या न करें?
करें: नाग पंचमी के दिन जरूरतमंदों को दान दें और पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करें।
न करें: इस दिन जमीन की खुदाई करने, हल चलाने या खेतों में काम करने से बचें। इसके अलावा नुकीली चीजों (जैसे सुई, कैंची) का इस्तेमाल और लोहे की कढ़ाई में खाना बनाने से भी परहेज करना चाहिए।
