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हॉस्टल में बदहाली: 50 बेड पर रह रहीं 140 छात्राएं; खराब खाने के विरोध में रात को थाने पहुंचीं लड़कियां

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धार जिले के निसरपुर स्थित माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर में बदहाली और खराब खाने से नाराज छात्राओं ने देर रात खिड़की से निकलकर कुक्षी थाने तक पैदल मार्च किया

  1. हॉस्टल में बदहाली: 50 बेड पर रह रहीं 140 छात्राएं; खराब खाने के विरोध में रात को थाने पहुंचीं लड़कियां

मुख्य बिंदु:

  • हॉस्टल की बदहाली: 50 बेड की क्षमता वाले हॉस्टल में जबरन रखी जा रही हैं 140 छात्राएं।
  • छात्राओं का आरोप: घटिया क्वालिटी का खाना दिया जाता है, विरोध करने पर चुप रहने की दी जाती है धमकी।
  • आधी रात को हंगामा: अव्यवस्थाओं से तंग आकर 35 छात्राएं रात में ही हॉस्टल से निकलकर शिकायत करने थाने पहुंचीं।

धार
सरकारी हॉस्टल में अव्यवस्थाओं और बदहाली का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हॉस्टल प्रशासन की तानाशाही और मूलभूत सुविधाओं की कमी से परेशान होकर लगभग 35 छात्राएं आधी रात को हॉस्टल परिसर से बाहर निकल गईं और सीधे पास के पुलिस थाने पहुंच गईं। छात्राओं का आरोप है कि हॉस्टल में रहने की क्षमता से तीन गुना अधिक लड़कियों को रखा जा रहा है और उन्हें जानवरों जैसा खाना परोसा जा रहा है।

50 बेड पर 140 लड़कियां, पैर रखने की जगह नहीं
थाने पहुंची छात्राओं ने रोते हुए पुलिस अधिकारियों को अपनी आपबीती सुनाई। छात्राओं ने बताया, “हॉस्टल में केवल 50 बेड स्वीकृत हैं, लेकिन प्रशासन ने वहां 140 लड़कियों को ठूंस-ठूंस कर रखा हुआ है। एक-एक बेड पर कई लड़कियों को सोना पड़ता है। कमरों में पैर रखने तक की जगह नहीं है, जिससे पढ़ाई करना तो दूर, सांस लेना भी दूभर हो गया है।”

“खराब खाना देते हैं और शिकायत करने पर चुप रहने को कहते हैं”
सुविधाओं की कमी यहीं खत्म नहीं होती। छात्राओं का सबसे गंभीर आरोप हॉस्टल के मेस में मिलने वाले भोजन को लेकर है। लड़कियों का कहना है कि उन्हें बेहद घटिया और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाना दिया जाता है। जब भी किसी छात्रा ने इस खराब खाने या हॉस्टल की बदहाली के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की, तो हॉस्टल प्रबंधन और वार्डन द्वारा उन्हें डांटकर चुप करा दिया गया। छात्राओं को धमकी दी जाती है कि अगर उन्होंने बाहर किसी से शिकायत की, तो उनका नाम हॉस्टल से काट दिया जाएगा।

आधी रात को थाने में हड़कंप, जांच में जुटा प्रशासन
रोज-रोज के मानसिक तनाव और बदहाली से तंग आकर आखिरकार छात्राओं के सब्र का बांध टूट गया। रात के वक्त जब हॉस्टल का स्टाफ लापरवाह था, तब 35 छात्राएं एकजुट होकर चुपचाप हॉस्टल से बाहर निकल आईं और न्याय की गुहार लगाने थाने पहुंच गईं।

इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं को रात के समय थाने में देखकर पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया। पुलिस ने तुरंत मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों और शिक्षा/महिला कल्याण विभाग को इसकी सूचना दी।

आगे की कार्रवाई
पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने छात्राओं को समझा-बुझाकर शांत कराया और उन्हें पूरी सुरक्षा व निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि हॉस्टल का औचक निरीक्षण किया जाएगा और यदि वार्डन या प्रबंधन दोषी पाया जाता है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल छात्राओं को वापस हॉस्टल भेज दिया गया है और वहां पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि छात्राओं को किसी भी तरह से प्रताड़ित न किया जा सके।


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