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MP में नागपंचमी का महा-कवरेज: उज्जयिनी में 6 लाख से अधिक का सैलाब, नांगलवाड़ी में 5 लाख तो रायसेन की ‘नाग अदालत’ में उमड़ी भारी भीड़

MP में नागपंचमी का महा-कवरेज: उज्जयिनी में 6 लाख से अधिक का सैलाब, नांगलवाड़ी में 5 लाख तो रायसेन की ‘नाग अदालत’ में उमड़ी भारी भीड़

मुख्य बिंदु (Highlights):


* दुर्लभ महासंयोग: सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी का एक साथ आना बना आस्था का केंद्र।


* उज्जैन: श्री नागचंद्रेश्वर के पट रात 12 बजे खुलते ही उमड़ा जनसैलाब, 6.19 लाख से अधिक दर्शन।


* नांगलवाड़ी: 3 किमी दुर्गम पहाड़ी चढ़कर 5 लाख श्रद्धालुओं ने किया भिलट देव का दुग्धाभिषेक।


* रायसेन: सिहोरा गांव में लगी अनोखी ‘नागों की अदालत’, नागोरी गांव में 10 फीट ऊंची मौर्यकालीन प्रतिमा पर पूजा।


* देवास व बुरहानपुर: महाभारत कालीन नागदा पहाड़ी और 400 साल पुराने अड़वाल मंदिर में आस्था चरम पर।

विशेष कवरेज / भोपाल


आज समूचे मध्य प्रदेश में नागपंचमी का पर्व अभूतपूर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष सावन का तीसरा सोमवार और नागपंचमी एक ही दिन होने की वजह से सूबे के तमाम जिलों में सुबह से ही आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा है, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उज्जैन के गर्भगृह से लेकर निमाड़ की पहाड़ियों और विंध्य-बुंदेलखंड के अंचलों तक, मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख नाग मंदिरों में आज पैर रखने की जगह नहीं है।

आइए जानते हैं आज नागपंचमी के दिन मध्य प्रदेश के इन प्रसिद्ध नाग मंदिरों में भीड़ की स्थिति और उनकी अनोखी मान्यताएं:

1. श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर (उज्जैन) – 6.19 lakh से अधिक श्रद्धालु
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष (तीसरी मंजिल) पर स्थित श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट रविवार रात ठीक 12 बजे खोल दिए गए। यह मंदिर साल में सिर्फ एक बार, केवल 24 घंटे के लिए खुलता है। ग्यारहवीं शताब्दी की अद्भुत प्रतिमा (जिसमें भगवान शिव-पार्वती सर्पासन पर विराजमान हैं) के दर्शन के लिए दोपहर तक 6,19,000 से अधिक भक्त हाजिरी लगा चुके हैं। भीड़ इतनी ज्यादा है कि श्रद्धालुओं को कतारों में 4 से 5 घंटे का समय लग रहा है।

2. नांगलवाड़ी भिलट देव मंदिर (बड़वानी) – 5 लाख से ज्यादा भक्त
निमाड़ अंचल के सबसे बड़े आस्था केंद्र बड़वानी के नांगलवाड़ी भिलट देव मंदिर में आज भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह से हो रही रिमझिम बारिश के बीच भी 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु 3 किलोमीटर का दुर्गम पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर बाबा भिलट देव के दर्शन करने पहुंचे। नागपंचमी पर आज बाबा का 101 लीटर दूध से अभिषेक किया गया और 108 व्यंजनों का महाभोग लगाया गया।

3. भिलट देव नाग मंदिर (महेश्वर, खरगोन) – 1.5 लाख श्रद्धालु
खरगोन जिले के महेश्वर (कसरावद मार्ग) पर स्थित प्रसिद्ध नाग मंदिर में नागपंचमी के dos दिवसीय मेले की शुरुआत हो चुकी है। आज सुबह से यहाँ करीब 1.5 लाख लोगों की भीड़ जुट चुकी है। आज नाग देवता को 11 क्विंटल शुद्ध देसी घी और आटे से बने चूरमे का महाभोग लगाया गया। इसके अलावा खरगोन के ही दामखेड़ा नाग मंदिर में भी हजारों ग्रामीणों ने दूध और लावा चढ़ाकर पूजा-अर्चन की।

4. सिहोरा की ‘नाग अदालत’ और नागोरी गांव (रायसेन) – भारी कौतूहल और भीड़
रायसेन जिले का सिहोरा गांव आज सबसे बड़े कौतूहल का केंद्र बना हुआ है, जहां नागपंचमी के दिन ‘नागों की अनोखी अदालत’ लगती है। मान्यता है कि यहां सर्पदंश या सर्पदोष से पीड़ित लोगों के शरीर में नाग की आत्मा आती है और पंडा जी के सामने अपनी बात रखती है। इसे देखने के लिए आज हजारों की संख्या में लोग पहुंचे हैं।
इसके साथ ही, सांची के पास स्थित नागोरी गांव की पहाड़ी पर स्थित अत्यंत प्राचीन (मौर्य/शुंग कालीन) 10 फीट ऊंची नाग बाबा की प्रतिमा पर भी आज सुबह से बेतवा नदी के तटीय इलाकों के हजारों ग्रामीणों ने जल और दूध अर्पित किया।

5. महाभारत कालीन नागदा पहाड़ियां (देवास) – 40 हजार से अधिक लोग
देवास जिले की नागदा पहाड़ियों पर आज सुबह से ही भक्तों की लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। मान्यता है कि महाभारत काल में राजा परीक्षित की मृत्यु के बाद उनके पुत्र जन्मेजय ने नागों के विनाश के लिए इसी स्थान पर नाग दहन (नागदमन) यज्ञ किया था। यहां मौजूद प्राचीन शिवलिंग और नाग प्रतिमाओं के दर्शन के लिए आज देवास और इंदौर संभाग से करीब 40 हजार से अधिक लोग पहुंचे हैं।

6. अड़वाल नाग मंदिर (बुरहानपुर) – 30 हजार से अधिक श्रद्धालु
बुरहानपुर जिले के उतावली नदी के तट पर उखड़ गांव में स्थित 400 साल पुराने अड़वाल नाग मंदिर में आज मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के सीमावर्ती इलाकों से भारी भीड़ जुटी है। इस मंदिर की अनोखी परंपरा है कि मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु यहां जीवित नाग-नागिट का जोड़ा लाकर छोड़ते हैं, जिसके कारण इसे ‘नाग-नागपनी का मेला’ भी कहा जाता है। आज दोपहर तक यहां 30 हजार से ज्यादा लोग दर्शन कर चुके हैं।

7. नागद्वार स्वामी मंदिर (पचमढ़ी) – दुर्गम यात्रा में उमड़े हजारों भक्त
सतपुड़ा के जंगलों के बीच पहाड़ों पर स्थित श्री नागद्वार स्वामी मंदिर की बेहद कठिन और दुर्गम यात्रा आज अपने चरम पर है। कजरी और चिंतामणि की गुफाओं से होते हुए भूराभगत की पहाड़ियां चढ़कर हजारों शिवभक्त और नाग उपासक दुर्गम रास्तों को पार करते हुए नागदेव के दर्शन के लिए पहुंचे हैं।

प्रशासनिक व्यवस्थाएं और सुरक्षा
मध्य प्रदेश के गृह विभाग और स्थानीय जिला प्रशासनों द्वारा सभी मंदिरों, विशेषकर उज्जैन, नांगलवाड़ी और रायसेन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। उज्जैन में लगातार हो रही भीड़ की मॉनिटरिंग सीसीटीवी कैमरों से की जा रही है। उमस और भारी भीड़ के कारण कुछ स्थानों पर श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रेडक्रॉस और सरकारी मेडिकल कैंपों में त्वरित उपचार दिया जा रहा है।

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