नई दिल्ली/मस्कट: खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। भारतीय क्रू वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर आज लगातार दूसरे दिन हमला हुआ है। ताज़ा घटना ओमान के तट के पास हुई है, जिससे क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। यह हमला कल होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई उस दुखद घटना के ठीक एक दिन बाद हुआ है, जिसमें एक अमेरिकी हमले के दौरान तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई थी।
ओमान तट के पास ताज़ा हमला
प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ओमान के तट के करीब नौकायन कर रहे एक मालवाहक जहाज को आज निशाना बनाया गया। इस जहाज पर भी भारतीय चालक दल सवार था। हालांकि, हमले की प्रकृति और जहाज या चालक दल को हुए नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है। भारतीय अधिकारी स्थिति पर करीब से नज़र रखे हुए हैं और ओमान के अधिकारियों तथा जहाज प्रबंधन कंपनी के साथ संपर्क में हैं।
इस घटना ने भारतीय नाविकों के परिवारों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, जो अपने प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
कल होर्मुज में हुई थी तीन भारतीयों की मौत
यह नया हमला कल की उस दर्दनाक घटना के घावों को और गहरा कर रहा है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में एक अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान क्रॉसफायर में एक वाणिज्यिक पोत आ गया था। उस घटना में जहाज पर सवार तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, वह जहाज क्षेत्र में चल रहे तनाव के बीच एक संवेदनशील मार्ग से गुजर रहा था। अमेरिकी सेना ने दावा किया था कि उन्होंने एक ‘आसन्न खतरे’ को बेअसर करने के लिए कार्रवाई की थी, लेकिन भारतीय क्रू की मौत ने इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने दोनों घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने कल मारे गए नाविकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की थी और आज की घटना के बाद एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है।
अधिकारियों का कहना है कि वे क्षेत्र में भारतीय नागरिकों और संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं। भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं।
बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
इन लगातार घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है। इस क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
फिलहाल, सभी की निगाहें भारत सरकार के अगले कदम और इस क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
(यह एक प्रारंभिक रिपोर्ट है, विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है)


