श्रावणी उपकर्म वेद प्रचार समारोह का हुआ भव्य समापन
- संस्कारों के साथ विवेकपूर्ण जीवन जीने का दिया संदेश
- माता-पिता और आचार्य के संस्कारों से बनता है व्यक्तित्व, गलत कार्यों का विरोध करना भी जरूरी : आचार्य अंकित प्रभाकर
मनोज शर्मा,चंडीगढ़, 16 अगस्त: आर्य समाज, सेक्टर-7 बी, चंडीगढ़ में आयोजित श्रावणी उपाकर्म, वेद प्रचार समारोह कार्यक्रम का आज विधिवत समापन हो गया। 13 से 16 अगस्त तक चले समारोह में वेद प्रचार, आध्यात्मिक चिंतन, भजन तथा सामाजिक एवं नैतिक जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं और आर्य समाज से जुड़े सभी लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
समापन अवसर के मुख्य वक्ता आचार्य अंकित प्रभाकर ने अपने संबोधन में कहा कि मनुष्य का व्यवहार और व्यक्तित्व अचानक नहीं बनता, बल्कि उसके निर्माण में परिवार, समाज और आचार्य के संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। व्यक्ति अपने आसपास के वातावरण से बहुत कुछ सीखता है। माता-पिता से प्राप्त संस्कार जीवन की नींव मजबूत करते हैं, वहीं आचार्य के विचार, आचरण और जीवनशैली का भी व्यक्ति के व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
आचार्य अंकित प्रभाकर ने कहा कि बड़ों और अनुभवी लोगों की अच्छी बातों को स्वीकार करना चाहिए, लेकिन इसके लिए बुद्धि को जागरूक और विवेकशील रखना आवश्यक है। आचार्य की उचित बात मानना अच्छी बात है, परंतु किसी गलत कार्य के लिए स्पष्ट रूप से मना करना भी जरूरी है। सही मार्गदर्शन और सुझाव के लिए अनुभवी एवं वरिष्ठ लोगों से संपर्क बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति के सामने परिवार और समाज की जिम्मेदारियां आती हैं तो उसमें गंभीरता और परिपक्वता का विकास होता है। अनुभवी व्यक्ति जिम्मेदारियों को समझते हुए परिस्थितियों के अनुसार संतुलित निर्णय लेने में सक्षम होता है। इसलिए युवा पीढ़ी को संस्कारों के साथ विवेक, जिम्मेदारी और सामाजिक चेतना को भी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।
प्रधान रविंद्र तलवाड़ ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं होते, बल्कि व्यक्ति को अपने जीवन, व्यवहार और सामाजिक दायित्वों पर चिंतन करने की प्रेरणा देते हैं। आर्य समाज वेदों के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के साथ समाज में सदाचार, जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
मंत्री प्रकाश चंद्र शर्मा ने कहा कि संस्कार व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी हैं। माता-पिता और आचार्य से मिले अच्छे संस्कार जीवनभर व्यक्ति का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
प्रचार मंत्री डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि वेद का संदेश मानव जीवन को सत्य, विवेक, कर्तव्य और सदाचार की दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आचार्यों एवं वरिष्ठजनों के अनुभव से सीखना चाहिए, लेकिन हर परिस्थिति में सही और गलत का निर्णय जागरूक बुद्धि से करना आवश्यक है। युवाओं को संस्कारवान, विवेकशील और जिम्मेदार नागरिक बनाने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ और ऋषि लंगर से हुआ।


