केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट: विस्थापितों के दर्द से रू-ब-रू हुए राहुल गांधी, कहा- संसद में उठाएंगे आवाज; जरूरत पड़ी तो खुद उतरूंगा जमीन पर
भोपाल:
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना (Ken-Betwa Link Project) के कारण अपने घर-बार और जमीनों को खोने की कगार पर खड़े प्रभावित ग्रामीणों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर अपना दुख-दर्द साझा किया। इस मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने पीड़ितों की समस्याओं को न केवल गंभीरता से सुना, बल्कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने का ठोस आश्वासन भी दिया।
विस्थापितों की पीड़ा पर संवेदना व्यक्त करते हुए राहुल गांधी ने दो टूक कहा कि यह केवल एक बुनियादी ढांचे का मुद्दा नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के अस्तित्व और आजीविका की बात है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि प्रभावितों को न्याय दिलाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें खुद धरातल पर उतरना पड़ा, तो वे इससे पीछे नहीं हटेंगे।
क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना?
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट भारत की पहली प्रमुख नदी जोड़ो परियोजना (Inter-linking of Rivers Project) है। इसके तहत मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त (सरप्लस) पानी को नहर के जरिए उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में डायवर्ट किया जाना है।
उद्देश्य: बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त इलाकों (मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना और उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी आदि जिलों) में पीने के पानी का संकट दूर करना और करीब 10 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना।
मुख्य निर्माण कार्य: इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में दौधन बांध (Daudhan Dam) का निर्माण किया जाएगा, जिससे केन और बेतवा नदियों को जोड़ने वाली लगभग 221 किलोमीटर लंबी नहर निकाली जाएगी।
विवाद और चिंताएं: परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) का एक बड़ा हिस्सा और कई गांव जलमग्न (डूब क्षेत्र) हो रहे हैं। इससे पर्यावरण संतुलन के बिगड़ने और बड़े पैमाने पर स्थानीय ग्रामीणों के विस्थापन को लेकर लगातार विरोध हो रहा है।
सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष की रणनीति
मुलाकात के दौरान प्रभावित क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों ने परियोजना के क्रियान्वयन से होने वाले व्यापक नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने राहुल गांधी को बताया कि पुनर्वास की नीतियां पारदर्शी नहीं हैं और मिलने वाला मुआवजा मौजूदा नुकसान की भरपाई के लिए बेहद अपर्याप्त है।
ग्रामीणों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आगामी संसदीय सत्र में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से प्रभावित लोगों के पुनर्वास, मुआवजे में विसंगतियों और पर्यावरण को हो रहे नुकसान के सवालों को पूरी ताकत के साथ संसद के पटल पर रखा जाएगा।
जमीनी स्तर पर नेतृत्व का वादा: राहुल गांधी ने ग्रामीणों को आश्यस्त किया कि यह लड़ाई सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगी। यदि प्रशासन ने प्रभावितों की मांगों पर संवेदनशीलता नहीं दिखाई, तो वे खुद प्रभावित गांवों का दौरा करेंगे और जनता के साथ मिलकर धरातल पर संघर्ष करेंगे।
विपक्ष के नेता के इस सीधे हस्तक्षेप के बाद अब प्रभावित ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि उनकी समस्याओं पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान केंद्रित होगा और सरकार पर पारदर्शी पुनर्वास नीति लागू करने का दबाव बनेगा।
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट विस्थापितों से मिले राहुल गांधी: ‘संसद में उठाएंगे मुद्दा, हक के लिए खुद जमीन पर उतरने को तैयार
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