कार से उतरते ही तड़तड़ाई AK-47…’ 1988 का वो खौफनाक दोपहर, जब पंजाब के सबसे बड़े रॉकस्टार अमर सिंह चमकीला की आवाज हमेशा के लिए खामोश कर दी
8 मार्च 1988। पंजाब का जालंधर जिला। दोपहर के करीब 2 बज रहे थे। धूप तेज थी और मेहसामपुर गांव के एक खुले मैदान में हजारों की भीड़ अपने चहेते सुपरस्टार ‘अमर सिंह चमकीला’ और उनकी पत्नी ‘अमरजोत कौर’ की एक झलक पाने के लिए बेताब खड़ी थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ ही मिनटों में वहां पंजाब के इतिहास का सबसे वीभत्स और सबसे बड़ा हत्याकांड होने वाला है, जिसकी गुत्थी अगले 38 सालों तक कोई नहीं सुलझा पाएगा।
1. मेहसामपुर का वो आखिरी सफर
चमकीला और अमरजोत अपनी सफेद एम्बेसेडर कार से मेहसामपुर गांव पहुंचे थे। उनके साथ उनका पूरा म्यूजिकल बैंड भी था। चमकीला उस समय सफलता के उस मुकाम पर थे जहां उनके एक-एक दिन में तीन-तीन शो होते थे। उनके ढोलक वादक (Dholak Player) लाल चंद, जो उस हमले में जिंदा बच गए थे, उन्होंने बाद में पुलिस को बताया था, “जैसे ही गाड़ी रुकी, चमकीला ने मुझसे कहा कि गाड़ी से सामान निकालो, अखाड़ा (मंच) तैयार है। अमरजोत कार से पहले उतरीं। जैसे ही चमकीला नीचे उतरे, अचानक एक जोरदार धमाका हुआ।”
2. वो 5 मिनट और सरेआम कत्लेआम
कार के रुकते ही तीन नकाबपोश युवक मोटरसाइकिल पर आए। उनके हाथों में हथियार थे। बिना एक पल गंवाए उन्होंने सीधे चमकीला और अमरजोत पर गोलियों की बौछार कर दी।
- अमरजोत को पहली गोली लगी: हमलावरों ने सबसे पहला निशाना अमरजोत को बनाया। गोली लगते ही वह वहीं गिर पड़ीं।
- चमकीला ने की बचाने की कोशिश: अपनी पत्नी को गिरते देख चमकीला उनकी तरफ लपके, लेकिन हमलावरों की ऑटोमैटिक राइफलों ने चमकीला के सीने को छलनी कर दिया।
- बैंड मेंबर्स पर भी फायरिंग: दहशत फैलाने के लिए हमलावरों ने उनके साथ आए साथियों (गायक सुरजीत खान और अन्य) पर भी गोलियां चलाईं। कुल 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
चमकीला के सेक्रेटरी और करीबी दोस्त मानकु के मुताबिक, हमलावरों ने वारदात को अंजाम देने के बाद हवा में हथियार लहराए, भांगड़ा किया और एक खत चमकीला की छाती पर रखकर फरार हो गए।
3. वो खत और उग्रवाद का साया (The Threat Letters)
80 का दशक पंजाब में उग्रवाद (Insurgency) का चरम दौर था। चमकीला के गाने आम लोगों की जिंदगी, रिश्तों की कड़वाहट और बोल्ड विषयों पर होते थे। उग्रवादी संगठनों का मानना था कि चमकीला के गाने ‘अश्लील’ हैं और वे पंजाबी संस्कृति को बिगाड़ रहे हैं।
हत्या से पहले चमकीला को कई बार धमकियां मिली थीं। वे कुछ समय के लिए छुप भी गए थे और उन्होंने अपने गानों के विषय बदलने की कोशिश भी की थी, लेकिन उनकी लोकप्रियता ही उनकी दुश्मन बन गई। पुलिस जांच में यह थ्योरी सबसे मजबूत मानी गई कि उग्रवादियों ने ‘सजा’ के तौर पर इस हत्याकांड को अंजाम दिया था।
4. इंडस्ट्री की अंदरूनी रंजिश (Professional Rivalry)
दूसरी सबसे बड़ी थ्योरी जो आज भी पंजाब के गलियारों में तैरती है, वह है व्यावसायिक दुश्मनी। चमकीला की फीस और डिमांड इतनी ज्यादा थी कि उस दौर के बाकी सभी दिग्गज गायकों के शोज बंद हो गए थे। चमकीला एक गरीब और दलित परिवार से आकर रातों-रात अरबपति बन गए थे। कई लोगों को उनका यह दबदबा रास नहीं आ रहा था। आरोप लगते हैं कि कुछ प्रतिद्वंदी कलाकारों ने उग्रवादी गुटों को पैसे देकर चमकीला को रास्ते से हटवाया था।
5. अंतहीन इंतजार: क्यों बंद हो गई फाइल?
इस हाई-प्रोफाइल मर्डर के बाद पंजाब पुलिस ने केस तो दर्ज किया, लेकिन उस दौर के बिगड़े हालातों के बीच कोई ठोस गवाह सामने नहीं आया। लोग खौफ के मारे मुंह खोलने को तैयार नहीं थे। कुछ सालों बाद खबर आई कि चमकीला की हत्या में शामिल संदिग्ध उग्रवादी अलग-अलग पुलिस एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं। कोर्ट में कोई पुख्ता चार्जशीट या सबूत न टिक पाने के कारण इस केस की फाइल को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।
चमकीला और अमरजोत की मौत के साथ ही पंजाब ने अपना सबसे चमकीला सितारा खो दिया, जिसकी चमक आज भी उनके गानों के जरिए जिंदा है, लेकिन इंसाफ का इंतजार आज भी अधूरा है।
