खाकी पर हनीट्रैप का वार: बस्ती में थानेदार खुदकुशी मामले का सनसनीखेज पर्दाफाश; बेटी, पिता और वकील का घिनौना सिंडिकेट गिरफ्तार
बस्ती (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में वाल्टरगंज के थाना प्रभारी (SO) सूर्य प्रकाश सिंह की संदिग्ध खुदकुशी के मामले में पुलिस ने एक ऐसे घिनौने और रोंगटे खड़े कर देने वाले आपराधिक सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसने पूरे सूबे की पुलिस को झकझोर कर रख दिया है। मामले की तह में जाने पर पता चला है कि कानून की रक्षा करने वाले 56 वर्षीय जांबाज थानेदार खुद एक सोचे-समझे और शातिर ‘हनीट्रैप’ (Honey Trap) जाल का शिकार हो गए थे।
इस हाई-प्रोफाइल केस में त्वरित कार्रवाई करते हुए बस्ती पुलिस की स्वात और सर्विलांस टीम ने मुख्य आरोपी महिला, उसके पिता और गिरोह के मुख्य रणनीतिकार वकील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
कैसे शुरू हुआ ‘प्यार, जिस्म और ब्लैकमेल’ का यह गंदा खेल?
पुलिस जांच के अनुसार, वाल्टरगंज क्षेत्र की ही रहने वाली 32 वर्षीय प्रियंका चौधरी ने कुछ समय पहले अपने ही पति के खिलाफ थाने में एक मुकदमा दर्ज कराया था। इसी केस के सिलसिले में उसका संपर्क तत्कालीन थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह से हुआ। प्रियंका ने धीरे-धीरे अपनी मीठी बातों से थानेदार को करीब लाया और उनके बीच शारीरिक संबंध बन गए।
लेकिन यह कोई इत्तेफाक या प्रेम संबंध नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी क्रिमिनल साजिश थी। प्रियंका ने निजी पलों के वीडियो, आपत्तिजनक चैट्स और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स को चुपके से सहेज लिया था।
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बेटी का जिस्म, पिता की धमकी और वकील की वसूली
जैसे ही आपत्तिजनक डिजिटल सबूत हाथ लगे, इस सिंडिकेट ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया। प्रियंका का पिता राम नयन चौधरी और उनका साथी वकील विजय प्रकाश यादव इस पूरे रैकेट को फ्रंट से संभाल रहे थे।
- दबाव की रणनीति: प्रियंका पीड़ितों को डराने के लिए कभी-कभी वीडियो कॉल पर अपने हाथ की नस काटने का नाटक करती थी, ताकि सामने वाला पूरी तरह सहम जाए।
- कानूनी व सामाजिक डर: इसके बाद उसका पिता और वकील पीड़ितों को केस करने, नौकरी से बर्खास्त करवाने और समाज में इज्जत नीलाम करने की धमकियां देते थे।
मौत से 60 मिनट पहले मांगी ₹1 करोड़ की फिरौती
29 अगस्त को थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह ने अपने सरकारी आवास में फंदे से लटककर अपनी जान दे दी थी। पुलिस की साइबर और सीडीआर (Call Detail Record) जांच में एक बेहद चौंकाने वाला नंबर सामने आया। खुदकुशी करने वाले दिन दोपहर 1:41 बजे आरोपी वकील विजय प्रकाश ने थानेदार को फोन किया था और मामले को रफा-दफा करने के एवज में ₹1 करोड़ की भारी-भरकम रकम की अंतिम डिमांड की थी।
इतनी बड़ी रकम का अचानक इंतजाम न कर पाने और समाज व विभाग में बदनामी के गहरे डर से आहत होकर बेबस थानाध्यक्ष ने एक घंटे के भीतर ही आत्मघाती कदम उठा लिया।
दर्जनों रसूखदार बन चुके हैं शिकार, डॉक्टरों से भी वसूले लाखों
पुलिस महानिरीक्षक (DIG) बस्ती मंडल और पुलिस कप्तान के निर्देश पर जब इस गैंग की कुंडली खंगाली गई, तो पता चला कि यह गिरोह प्रोफेशनल तरीके से रसूखदार लोगों को निशाना बनाता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि प्रियंका, उसके पिता और वकील ने इलाके के ही एक नामचीन डॉक्टर समेत तीन अन्य संपन्न लोगों को भी इसी तरह अपने जाल में फंसाकर करीब ₹24 लाख की मोटी रकम वसूली थी।
मृतक थानाध्यक्ष के बेटे संदीप सिंह की शिकायत पर धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 3(5) बीएनएस (BNS) के तहत केस दर्ज कर पुलिस ने तीनों शातिरों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस का मानना है कि इस गैंग के मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्यों से आने वाले दिनों में कुछ और बड़े रसूखदार चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं।
