Home बिजनेस BOI-50 कर्मचारियों से शुरू हुआ सफर, आज बना देश का बैंकिंग दिग्गज...

BOI-50 कर्मचारियों से शुरू हुआ सफर, आज बना देश का बैंकिंग दिग्गज – बैंक ऑफ इंडिया का संपूर्ण इतिहास

0

50 कर्मचारियों से शुरू हुआ सफर, आज बना देश का बैंकिंग दिग्गज – बैंक ऑफ इंडिया का संपूर्ण इतिहास

मुंबई:
आज 7 सितंबर 2026 को देश के अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक, बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India), अपना 121वाँ स्थापना दिवस मना रहा है। मात्र एक छोटे से दफ्तर और मुट्ठी भर कर्मचारियों के साथ शुरू हुआ यह सफर आज वैश्विक स्तर पर एक विशाल बैंकिंग नेटवर्क में तब्दील हो चुका है। शुरुआत से लेकर अब तक के इसके इतिहास की हर छोटी-बड़ी और महत्वपूर्ण जानकारी इस प्रकार है:

1. 1906: स्वदेशी आंदोलन और बैंक की स्थापना

ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान जब देश में स्वदेशी आंदोलन की भावना जोर पकड़ रही थी, तब मुंबई (तब बॉम्बे) के विभिन्न व्यापारिक समुदायों ने मिलकर एक शुद्ध भारतीय बैंक की कल्पना की। पारसी, भाटिया, गुजराती बनिया, बोहरा मुस्लिम और यहूदी समुदायों के दिग्गज व्यवसायी देश के व्यापार को आधुनिक तर्ज पर बढ़ावा देने के लिए एक साथ आए।

7 सितंबर 1906 को सर शापुरजी ब्रोचा, सर ससून जे. डेविड, सर कावासji जहांगीर, सर रामनारायण रुइया और जे. एन. टाटा के घराने से जुड़े रतनजी दादाभाई टाटा जैसी महान हस्तियों ने इस बैंक की नींव रखी। बैंक ने मुंबई में केवल एक कार्यालय, ₹50 लाख की चुकता पूंजी (Paid-up Capital) और सिर्फ 50 कर्मचारियों के साथ अपना कामकाज शुरू किया था।

यह भी पढ़े

SBI Mega Plan: देश का सबसे बड़ा बैंक करेगा 12,000 नई भर्तियां, चालू वित्त वर्ष में खुलेंगे 250 नए ब्रांचेज

2. 1946: आजादी से पहले ही वैश्विक मंच पर कदम

बैंक ऑफ इंडिया ने भारत की आजादी से ठीक एक साल पहले, 1946 में लंदन में अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय शाखा खोलकर एक नया इतिहास रच दिया था। किसी भी भारतीय बैंक द्वारा देश की सीमाओं से बाहर जाकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार में कदम रखने का यह पहला बड़ा और साहसिक प्रयास था। इसके बाद बैंक ने धीरे-धीरे दुनिया के अन्य व्यापारिक केंद्रों में भी अपनी साख जमाई।

3. 1969: ऐतिहासिक राष्ट्रीयकरण (Nationalisation)

शुरुआत से लेकर अगले 63 वर्षों तक यह बैंक पूरी तरह से निजी स्वामित्व (Private Ownership) में सफलतापूर्वक काम करता रहा। लेकिन देश की आर्थिक प्रगति, आम जनता की वित्तीय पहुंच और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया। 19 जुलाई 1969 को बैंक ऑफ इंडिया सहित देश के 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया, जिसके बाद यह एक सरकारी यानी सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक बन गया। राष्ट्रीयकरण के बाद बैंक ने आम जनता और कृषि क्षेत्र की मदद के लिए बड़े पैमाने पर काम करना शुरू किया।

4. 1989: तकनीकी क्रांति और देश का पहला ATM

बैंक ऑफ इंडिया हमेशा से भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में नई तकनीक और नवाचार (Innovation) अपनाने में सबसे आगे रहा है। सरकारी या राष्ट्रीयकृत बैंकों की पूरी श्रेणी में बैंक ऑफ इंडिया ही पहला ऐसा बैंक था, जिसने साल 1989 में मुंबई की महालक्ष्मी शाखा में पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत (Computerised) शाखा और एटीएम (ATM) सुविधा की शुरुआत की थी। इसके अलावा, यह भारत में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन को सुरक्षित बनाने वाली वैश्विक प्रणाली ‘स्विफ्ट’ (SWIFT) का संस्थापक सदस्य भी रहा है।

5. 1997: शेयर बाजार में लिस्टिंग (IPO)

राष्ट्रीयकरण के बाद बैंक का कामकाज तेजी से बढ़ा। अपनी पूंजी को और मजबूत करने तथा जनता को बैंक का हिस्सेदार बनाने के लिए बैंक ऑफ इंडिया साल 1997 में अपना पहला पब्लिक इश्यू (IPO) लेकर आया, जिसके बाद यह शेयर बाजार में लिस्टेड हुआ। इसके बाद फरवरी 2008 में बैंक ने संस्थागत निवेशकों के जरिए पूंजी जुटाने के लिए क्यूआईपी (QIP) भी जारी किया।

यह भी पढ़े

India Post GDS Recruitment 2026: भारतीय डाक विभाग में ग्रामीण डाक सेवकों के 23,757 पदों पर भर्ती, बिना लिखित परीक्षा सीधे मेरिट से होगा चयन; जानें प्रक्रिया

6. आज की स्थिति: 5 महाद्वीपों में वैश्विक पहचान

50 कर्मचारियों से शुरू होकर, आज बैंक ऑफ इंडिया 10 करोड़ से अधिक ग्राहकों के भरोसे के साथ एक विशाल वैश्विक वित्तीय संस्थान बन चुका है:

  • विशाल नेटवर्क: वर्तमान में भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बैंक की 5,300 से अधिक शाखाएं और एक मजबूत डिजिटल नेटवर्क काम कर रहा है, जो 54 जोनल कार्यालयों द्वारा नियंत्रित होता है।
  • वैश्विक मौजूदगी: बैंक की पहुंच केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के 15 देशों (5 महाद्वीपों) में इसकी 45 से अधिक विदेशी शाखाएं, सब्सिडियरी और प्रतिनिधि कार्यालय मौजूद हैं, जिनमें टोक्यो, हांगकांग, लंदन, पेरिस, न्यूयॉर्क और सिंगापुर जैसे प्रमुख वैश्विक वित्तीय केंद्र शामिल हैं। साथ ही गुजरात के गिफ्ट सिटी (GIFT City) में इसका इंटरनेशनल बैंकिंग यूनिट भी सक्रिय है।

एक सदी से भी अधिक पुराने इस स्वर्णिम सफर में बैंक ऑफ इंडिया ने पारंपरिक मूल्यों को आधुनिक तकनीक के साथ बखूबी जोड़ा है। आज अपने 121वें स्थापना दिवस पर यह बैंक करोड़ों ग्राहकों के भरोसे और “रिश्तों की जमापूंजी” के वादे के साथ भारत की आर्थिक विकास यात्रा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।


NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version