भोपाल: स्टाइपेंड वृद्धि के लिए CM हाउस कूच कर रहे MBBS इंटर्न्स पर वाटर कैनन; हमीदिया परिसर छावनी में बदला, भारी बवाल
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी में सोमवार को शासकीय मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टरों और पुलिस प्रशासन के बीच ज़बरदस्त टकराव देखने को मिला. गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) से अपनी आर्थिक मांगों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास का घेराव करने निकले सैकड़ों डॉक्टरों को पुलिस ने हमीदिया अस्पताल के भीतर और उसके निकास द्वारों पर भारी बैरिकेडिंग करके रोक दिया. इस दौरान प्रदर्शनकारी डॉक्टरों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़प हुई. उग्र होती भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन (पानी की बौछारों) का इस्तेमाल किया और हल्का बल प्रयोग किया. पानी की तेज बौछार की चपेट में आने से एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
इमरजेंसी गेट ब्लॉक, सुरक्षा घेरा तोड़ सड़कों पर उतरे छात्र
प्रदर्शनकारियों की रणनीति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने हमीदिया अस्पताल परिसर के चारों ओर लोहे के मजबूत बैरिकेड्स लगा दिए थे. छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने अस्पताल के सामान्य रास्तों के साथ-साथ इमरजेंसी गेट को भी वाहनों और सुरक्षा बलों से पूरी तरह ब्लॉक कर दिया था. खुद को परिसर में कैद पाकर गुस्साए डॉक्टरों ने बैरिकेड्स और द्वारों को धक्का देकर पार किया और फतेहगढ़ के मुख्य मार्ग पर आ गए. डॉक्टरों के सड़क पर ही धरने पर बैठ जाने से पूरे इलाके में चक्काजाम की स्थिति बन गई और यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई.
क्या है पूरा विवाद? (प्रमुख मांगें और कारण)
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे इंटर्न डॉक्टर मोहित मिश्रा और अन्य छात्र प्रतिनिधियों के अनुसार, यह आक्रोश पिछले कई महीनों से मिल रहे प्रशासनिक आश्वासनों के टूटने का नतीजा है:
- ₹14,337 बनाम ₹30,000 की मांग: मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टरों को वर्तमान में केवल ₹14,337 प्रति माह का मानदेय मिलता है. डॉक्टरों का कहना है कि 24 से 36 घंटे की कठिन अस्पताल ड्यूटी और एक लाख रुपये से अधिक की सालाना ट्यूशन फीस के मुकाबले यह राशि बेहद कम है. वे इसे बढ़ाकर तत्काल ₹30,000 मासिक करने की मांग कर रहे हैं.
- उत्तर प्रदेश का हवाला: छात्रों के मुताबिक, राज्य के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने पूर्व में आश्वासन दिया था कि यदि उत्तर प्रदेश सरकार स्टाइपेंड बढ़ाएगी तो मध्य प्रदेश में भी इसे लागू किया जाएगा. अब यूपी में स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹25,000 करने का आधिकारिक आदेश जारी हो चुका है, लेकिन मध्य प्रदेश में इसे लेकर कोई प्रशासनिक हलचल नहीं है.
- अब आश्वासन नहीं, लिखित आदेश चाहिए: डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि करीब एक महीने पहले सरकार द्वारा जल्द निर्णय लेने का केवल मौखिक भरोसा दिया गया था. छात्र अब किसी भी मौखिक आश्वासन को मानने के लिए तैयार नहीं हैं और जब तक मुख्यमंत्री या उनका कोई अधिकृत प्रतिनिधि आकर स्टाइपेंड वृद्धि का आधिकारिक लिखित आदेश नहीं सौंपता, वे पीछे नहीं हटेंगे.
बाहरी जिलों से आ रहे डॉक्टरों को नजरबंद करने के आरोप
आंदोलनकारियों ने पुलिस पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि इस राज्यव्यापी प्रदर्शन को कमजोर करने के लिए प्रशासन ने दमनकारी नीतियां अपनाईं. सागर, जबलपुर और अन्य जिलों के मेडिकल कॉलेजों से भोपाल आ रहे सहयोगी डॉक्टरों की बसों और गाड़ियों को नादरा बस स्टैंड और भोपाल की अन्य सीमाओं पर ही पुलिस द्वारा रोक लिया गया या उन्हें आगे नहीं आने दिया गया.
फिलहाल, हमीदिया अस्पताल परिसर और फतेहगढ़ मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात है. डॉक्टरों ने अपनी मांगें पूरी होने तक आपातकालीन सेवाओं के आंशिक बहिष्कार और अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी है.
