Monday, October 12, 2026

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बुधनी में आदिवासियों के...

मध्य प्रदेश की बुधनी विधानसभा के कोसमी गांव में गरीब आदिवासियों के घरों पर प्रशासन के बुलडोजर चलने के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद पीड़ितों के साथ धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने मौके से ही मुख्य सचिव को फोन लगाकर कड़ी फटकार लगाई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

लव मैरिज का खौफनाक...

गाजियाबाद के खोड़ा में अवैध संबंधों के चलते पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर की पति की हत्या। मकान मालिक को फंसाने के लिए किया रोने का नाटक। पुलिस ने 12 घंटे में किया भंडाफोड़। पूरी खबर पढ़ें।

सीहोर के कोसमी गांव...

MP News: सीहोर के कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई के बाद प्रभावित आदिवासी परिवारों से मिले केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान। मुख्य सचिव को दिए पीड़ित परिवारों के तुरंत पुनर्वास और पक्के मकान बनाने के निर्देश। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

सवाल पूछो तो ‘टैग’...

आज के भारत में सवाल पूछने पर जवाब नहीं बल्कि 'गोदी मीडिया' या 'चमचा' का टैग मिलता है। जानिए कैसे यह 'लेबलिंग पॉलिटिक्स' और सोशल मीडिया इको-चैंबर हमारे लोकतंत्र को खोखला कर रहे हैं। पूरा विश्लेषण पढ़ें।
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CM शुभेंदु का कड़ा अल्टीमेटम: “बांग्लादेशियो, यहाँ से जल्दी भागो, जेल में बिठाकर नहीं खिलाएंगे”

कोलकाता:

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर एक बेहद सख्त और विवादित बयान दिया है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर बांग्लादेशी नागरिकों को राज्य छोड़ने की चेतावनी दी। उनके इस बयान के बाद राज्य और सीमावर्ती इलाकों में हलचल तेज हो गई है।

“जेल नहीं भेजेंगे, वो दामाद नहीं जो बिठाकर खिलाएं”

मुख्यमंत्री अधिकारी ने अपने भाषण में घुसपैठ के मुद्दे पर राज्य सरकार के कड़े रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “बांग्लादेशियो, यहाँ से जल्दी भागो।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार अवैध प्रवासियों को जेल में नहीं रखेगी क्योंकि वे “दामाद नहीं हैं जिन्हें बिठाकर खिलाया जाए।” मुख्यमंत्री का यह बयान स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार घुसपैठियों को सीधे डिपोर्ट (वापस भेजने) करने की नीति पर काम कर रही है, न कि उन्हें भारत की जेलों में रखने की।

बॉर्डर पर जुटने लगे बांग्लादेशी

मुख्यमंत्री के इस कड़े अल्टीमेटम के बाद की स्थिति तनावपूर्ण होती दिख रही है। सूत्रों के हवाले से मिली ख़बरों के अनुसार, मुख्यमंत्री की चेतावनी के बाद कई बांग्लादेशी नागरिक भारत-बांग्लादेश सीमा की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि, सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है कि सीमा पर किस तरह की हलचल है या क्या कोई बड़े पैमाने पर वापसी हो रही है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

मुख्यमंत्री के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने भाषा के इस्तेमाल और राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और राज्य के संसाधनों को बचाने के लिए उठाया गया एक जरूरी कदम बताया है।

आगे क्या?

अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस चेतावनी को जमीन पर किस तरह से लागू करती है। प्रशासन क्या कदम उठाता है और सीमावर्ती इलाकों में कानून-व्यवस्था की स्थिति कैसे नियंत्रित की जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। इसके अलावा, केंद्र सरकार और बांग्लादेश की इस पूरे मामले पर क्या प्रतिक्रिया होती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

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