रतलाम। देश के सबसे आधुनिक और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे (Delhi-Mumbai Expressway) के निर्माण की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में एक्सप्रेस-वे का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे सड़क पर बेहद खतरनाक और गहरी दरारें (Cracks) आ गई हैं। गनीमत रही कि समय रहते इस खराबी पर नजर पड़ गई, वरना 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाले वाहन किसी बड़ी दुर्घटना का शिकार हो सकते थे।
शिवगढ़ के पास 30 फीट ऊंचे अंडरपास पर आई दरार
यह मामला रतलाम के शिवगढ़ के पास का है। यहाँ एक्सप्रेस-वे के मुंबई जाने वाले मार्ग (लेन) पर बने एक बड़े अंडरपास पुल के ऊपर की सड़क अचानक क्रैक हो गई। इस अंडरपास की गहराई जमीन से लगभग 30 फीट नीचे है। चूंकि यह एक हाई-स्पीड कॉरिडोर है जहाँ गाड़ियाँ बेहद तेज रफ्तार में चलती हैं, इसलिए अगर कोई वाहन इस बड़े क्रैक की चपेट में आता तो वह सीधे नीचे गिर सकता था। घटना की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी टीमों को तुरंत अलर्ट किया गया।
महज 3 साल में खुली दावों की पोल, सिंहस्थ 2028 से पहले बढ़ी चिंता
भारतमाला परियोजना (Bharatmala Project) के तहत बने इस 8-लेन एक्सप्रेस-वे का मध्य प्रदेश वाला 244 किलोमीटर का हिस्सा (जो मंदसौर और रतलाम से होकर गुजरता है) करीब तीन साल पहले ही आम जनता के लिए खोला गया था। इतनी जल्दी पुल के जॉइंट्स और सड़क पर इतनी बड़ी दरार आना इंजीनियरिंग और मेंटेनेंस पर सवालिया निशान लगाता है।
स्थानीय जानकारों का कहना है कि साल 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महापर्व के दौरान इस रूट पर महाराष्ट्र और गुजरात से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की गाड़ियों का भारी दबाव रहेगा। ऐसे में मुख्य हाईवे का इस तरह डैमेज होना भविष्य के लिहाज से बड़ी चिंता का विषय है।
एनएचएआई (NHAI) का एक्शन; ट्रैफिक किया गया डायवर्ट
मामले की जानकारी मिलते ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और रोड मेंटेनेंस कंपनी के इंजीनियर्स भारी मशीनों के साथ मौके पर पहुंच गए। सुरक्षा के मद्देनजर हाईवे पर तुरंत निम्नलिखित कड़े कदम उठाए गए हैं:
- लेन की गई ब्लॉक: मुंबई की तरफ जाने वाली 4 लेनों में से जिस हिस्से में दरार आई थी, सुरक्षा कारणों से उस पूरी प्रभावित पट्टी (Lane) को बंद कर दिया गया है।
- ग्रीन जाली से बैरिकेडिंग: रात के अंधेरे में या तेज रफ्तार के दौरान कोई गाड़ी हादसे का शिकार न हो, इसके लिए डैमेज एरिया के चारों तरफ सुरक्षा जाली (Green Net) और बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं।
- डायवर्जन चालू: दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आने वाले ट्रैफिक को कुछ दूरी पहले से ही अन्य बची हुई सुरक्षित लेनों पर डायवर्ट करके निकाला जा रहा है।
पूरी तरह ठीक होने में लगेगा 15 दिन से ज्यादा का समय
स्पॉट पर काम कर रहे अधिकारियों और मेंटेनेंस स्टाफ के अनुसार, डैमेज हुए हिस्से को कंक्रीट कटर से पूरी तरह खोदकर हटा दिया गया है। अब पुल और सड़क के बीच के हिस्से को नए सिरे से री-कंस्ट्रक्ट (पुनर्निर्माण) किया जा रहा है। कंक्रीट फिलिंग और उसकी क्योरिंग (मजबूती की अवधि) को देखते हुए इस हिस्से को दोबारा पूरी तरह चालू करने में कम से कम 15 दिन या उससे अधिक का समय लग सकता है। हाईवे अथॉरिटी ने इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को सावधानी से ड्राइव करने की हिदायत दी है।
