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SIR विवाद: नाम कटा तो घर जाकर दस्तावेज लेंगे अफसर; विवाद के बाद चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, 30 राज्यों में 13.37 करोड़ नाम हटे

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SIR विवाद: नाम कटा तो घर जाकर दस्तावेज लेंगे अफसर; विवाद के बाद चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, 30 राज्यों में 13.37 करोड़ नाम हटे

नई दिल्ली:
विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर हुए बदलावों को लेकर मचे राजनीतिक घमासान के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि यदि इस अभियान के दौरान किसी भी वैध नागरिक का नाम मतदाता सूची से कटता है, तो निर्वाचन अधिकारी (BLO) खुद उनके घर जाकर दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करेंगे।

विपक्ष और सामाजिक संगठनों द्वारा पारदर्शिता पर उठाए जा रहे गंभीर सवालों के बाद आयोग का यह निर्णय मतदाताओं को बड़ी राहत देने वाला माना रहा है।

विवाद के बाद चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: अब कैसे होगा वेरिफिकेशन?

पिछले कुछ दिनों से मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी। इस भ्रम और विवाद को शांत करने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं:

  • घर-घर जाकर सत्यापन (Physical Verification): यदि किसी तकनीकी त्रुटि या सिस्टम-जनरेटेड कारणों से किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट रोल से हटा दिया गया है, तो बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) सीधे उस मतदाता के पते पर जाकर संबंधित पहचान दस्तावेज (Aadhaar, Voter ID आदि) की जांच करेंगे।
  • सुनवाई का अधिकार: आयोग ने कड़े शब्दों में कहा है कि बिना उचित जांच और मतदाता को अपना पक्ष रखने का मौका दिए, किसी भी नागरिक का नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची (Final Electoral Roll) से गायब नहीं किया जा सकता।
  • असंग्रहीत सूची का प्रकाशन: स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हटाए गए मतदाताओं की सूची स्थानीय राजनीतिक दलों के एजेंटों को उपलब्ध कराएं और इसे जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी सार्वजनिक करें।

30 राज्यों और UTs का आंकड़ा: क्यों कटे 13.37 करोड़ नाम?

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत अब तक 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों (UTs) की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13.37 करोड़ नाम हटाए या संशोधित किए गए हैं। इतने बड़े पैमाने पर नाम कम होने के पीछे निर्वाचन आयोग ने मुख्य रूप से तीन प्रशासनिक कारण बताए हैं:

  1. मृत मतदाता (Deceased Voters): ऐसे नागरिक जिनकी मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके नाम लंबे समय से मतदाता सूची से हटाए नहीं गए थे।
  2. स्थान परिवर्तन (Shifted Citizens): जो लोग स्थायी रूप से अपना मूल निवास या विधानसभा क्षेत्र छोड़कर किसी अन्य शहर या राज्य में बस चुके हैं।
  3. दोहरी प्रविष्टियां (Duplicate Entries): तकनीकी सुधार (Purification) के जरिए उन नामों को हटाया गया है, जो एक से अधिक बूथों या अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज थे।

अफवाहों और आंतरिक मतभेद की खबरों पर विराम

विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे एकतरफा नाम काटने के आरोपों और सोशल मीडिया पर चल रही “वोट चोरी” की अफवाहों पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आधिकारिक प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी (Electoral Roll Purification) बनाने की एक सामान्य और कानूनी प्रक्रिया है। आयोग के भीतर लिए गए सभी निर्णय पूरी तरह सर्वसम्मति से तय किए गए हैं।

मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा कैसे जुड़वाएं?

अगर आपको अंदेशा है कि इस पुनरीक्षण अभियान के दौरान आपका नाम भी मतदाता सूची से कट गया है, तो आप नीचे दिए गए तरीकों से इसे दोबारा जुड़वा सकते हैं:

  • ऑनलाइन दावा: चुनाव आयोग के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल National Voters’ Service Portal (NVSP) पर जाएं।
  • फॉर्म-6 (Form-6): यदि नाम कट गया है या नया आवेदन करना है, तो फॉर्म-6 भरकर ऑनलाइन सबमिट करें।
  • ऑफलाइन विकल्प: आप अपने नजदीकी बीएलओ (BLO) या तहसील कार्यालय में जाकर भी भौतिक रूप से फॉर्म जमा कर आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करवा सकते हैं।

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