मुंबई: भारतीय सिनेमा के इतिहास में समय-समय पर ऐसी फिल्में आती हैं जो बड़े-बड़े सुपरस्टार्स और सौ-सौ करोड़ के बजट वाली फिल्मों को घुटने टेकने पर मजबूर कर देती हैं। इस समय बॉक्स ऑफिस पर ऐसा ही एक महा-चमत्कार कर रही है आध्यात्मिक फिल्म ‘हनुमान अंश‘ (Hanuman Ansh)। महान संत नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित इस फिल्म ने कमाई के सारे पुराने समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है।
महज़ ₹2 करोड़ के नॉमिनल बजट में बनी इस फिल्म ने अपनी रिलीज़ के 48 दिनों में दुनिया भर में ₹372.20 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है और बहुत जल्द ₹400 करोड़ के क्लब में शामिल होने की ओर बढ़ रही है।
50 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, बनी सबसे मुनाफेदार फिल्म
‘हनुमान अंश’ ने घरेलू बॉक्स ऑफिस (India Net Collection) पर ₹285 करोड़ की शानदार कमाई की है। अपनी लागत से 180 गुना से अधिक का प्रॉफिट कमाकर इसने साल 1975 में आई क्लासिक भक्ति फिल्म ‘जय संतोषी मां’ का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अब यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली (Most Profitable) फिल्म बन चुकी है।
इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सुपरस्टार यश की ‘टॉक्सिक’ (Toxic) और सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ जैसी मेगा-बजट फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया है।
क्या है फिल्म की कहानी?
यह फिल्म कैंची धाम के प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा (जिन्हें उनके भक्त हनुमान जी का अंश मानते हैं) के शुरुआती जीवन पर आधारित है।
- सफरनामा: फिल्म में बाबा के बचपन (लक्ष्मण नारायण शर्मा), मां के निधन के बाद वैराग्य, और फिर पिता के आदेश पर वापस गृहस्थ जीवन में लौटने के सफर को बेहद सादगी और भावुकता के साथ दिखाया गया है।
- ट्रेन का प्रसिद्ध चमत्कार: फिल्म का सबसे बड़ा हाईलाइट वह सीन है जब बिना टिकट होने के कारण बाबा को ट्रेन से उतार दिया जाता है, और उसके बाद लाख कोशिशों के बाद भी ट्रेन टस से मस नहीं होती।
सेट पर हुए ‘चमत्कार’ और सात्विक माहौल
फिल्म के मेकर्स और मुख्य अभिनेता शोभिनव सत्या ने साझा किया कि इस फिल्म को व्यावसायिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि एक साधना की तरह बनाया गया।
- प्रेमानंद महाराज का मार्गदर्शन: शूटिंग शुरू करने से पहले मेकर्स ने वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद और मार्गदर्शन लिया था।
- सेट के नियम: शूटिंग के दौरान सेट पर पूरी तरह सात्विक माहौल था। हर दिन के काम की शुरुआत और अंत हनumान चालीसा के पाठ से होती थी।
- लंगूर का आना: चित्रकूट में एक गुफा के पास शूटिंग के दौरान एक लंगूर वहां आया और शूटिंग खत्म होने तक वहीं रहा, जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार उस इलाके में सालों से कोई बंदर नहीं देखा गया था।
फिल्म की सफलता के 3 मुख्य कारण (Analysis)
- माउथ पब्लिसिटी (Word of Mouth): फिल्म का कोई बड़ा प्रमोशन नहीं किया गया था, दर्शकों ने खुद एक-दूसरे को बताकर इसे ब्लॉकबस्टर बनाया।
- नीम करोली बाबा के प्रति आस्था: देश-видео (विदेश) में बाबा के करोड़ों भक्त हैं, जो इस फिल्म से भावनात्मक रूप से जुड़ गए।
- सिम्पल स्क्रीनप्ले: भारी-भरकम वीएफएक्स (VFX) के बजाय मेकर्स ने कहानी की सादगी और एक्टिंग पर भरोसा जताया, जो दर्शकों के दिलों को छू गई।
