भोपाल। मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों जबरदस्त भूचाल आया हुआ है। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में जारी की गई प्रशासनिक तबादला सूची के बाद 2011 बैच की सीनियर आईएएस अधिकारी नेहा मारव्या सिंह (IAS Neha Marvya Singh) का दर्द और आक्रोश सार्वजनिक रूप से सामने आया है। वर्तमान पद पर जॉइन करने के महज 50 दिनों के भीतर और पिछले एक साल में चौथी बार ट्रांसफर किए जाने से नाराज महिला अधिकारी ने आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन के आधिकारिक ग्रुप में एक बेहद तीखा और भावुक संदेश साझा किया है।
नेहा मारव्या ने सीधे तौर पर सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लिखा, “क्या एक आईएएस अधिकारी इतना कमजोर है कि उसके मातहत (जूनियर) कर्मचारी भी उसके खिलाफ विद्रोह कर दें और उसका तबादला कराने में सफल हो जाएं?”
‘केबिन में मेज पर हाथ मारकर कर्मचारी देते थे धमकी’
व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल हुए इस संदेश में आईएएस नेहा मारव्या ने अपने साथ हुई आपबीती का सिलसिलेवार जिक्र किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके नीचे काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने उनके खिलाफ एक सोची-समझी साजिश रची थी। स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी थी कि कुछ कर्मचारी उनके केबिन में आकर मेज पर हाथ मारते थे और उन्हें सीधे ट्रांसफर कराने की धमकियां देते थे।
उन्होंने बताया कि फाइलों में गड़बड़ी, आदेशों की अवहेलना और दुर्व्यवहार को लेकर उन्होंने उचित माध्यम (Proper Channel) से उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायतें भी भेजी थीं। उन्हें उम्मीद थी कि इस गंभीर अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन दोषियों पर एक्शन लेने के बजाय सरकार ने उनका ही तबादला कर दिया। उन्होंने अपनी पोस्ट में निराशा व्यक्त करते हुए लिखा कि अक्सर षड्यंत्र करने वाले लोग जीत जाते हैं और ईमानदारी से काम करने वाले हार जाते हैं।
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‘1 साल में 4 ट्रांसफर, 2 महीने में काम कैसे समझें?’
बार-बार होने वाले इन छोटे कार्यकालों को लेकर भी महिला आईएएस ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि किसी भी अधिकारी को नई जगह के कामकाज, वहां की फाइलों और जिम्मेदारियों को समझने में ही कम से कम 2 से 3 महीने का समय लगता है। लेकिन जब तक वह व्यवस्था को पूरी तरह समझ पाती हैं, तब तक उनका नाम फिर से ट्रांसफर लिस्ट में आ जाता है। एक साल में चार बार हुए इन तबादलों ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद हतोत्साहित (Demotivated) किया है।
क्या था पूरा मामला और अब मिली क्या जिम्मेदारी?
बता दें कि मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया गया था। इस फेरबदल से ठीक पहले नेहा मारव्या आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं की संचालक और मैपसेट के साथ-साथ अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रही थीं।
नए आदेशों के बाद उन्हें इन अहम पदों से हटाकर अब केवल ‘प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम’ के पद पर सीमित कर दिया गया है। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर ब्यूरोक्रेसी में चर्चाओं का बाजार गर्म है और आईएएस एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिकारी दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले को शांत कराने का प्रयास कर रहे हैं।



