भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और निजी स्पेस टेक (Space-Tech) क्षेत्र ने एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट ‘MOI-1A’ सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में लॉन्च हो गया है। हैदराबाद की डीप-टेक स्पेस स्टार्टअप कंपनी TakeMe2Space द्वारा विकसित इस अनोखे ‘सोचने वाले सैटेलाइट’ को एलन मस्क की कंपनी SpaceX के फाल्कन-9 (Transporter-18) राइडशेयर मिशन के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया है।
इस बड़ी कामयाबी के साथ भारत अंतरिक्ष में ही डेटा प्रोसेस करने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है। अमेरिका, चीन और यूरोपीय संघ (EU) के बाद भारत ऐसी क्रांतिकारी क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है।
स्पेस में ऑन-द-स्पॉट प्रोसेसिंग: बचेगा समय और भारी खर्च
अब तक पारंपरिक सैटेलाइट्स अंतरिक्ष से विशाल मात्रा में कच्चा डेटा (Raw Data) और तस्वीरें पृथ्वी पर स्थित ग्राउंड स्टेशनों को भेजते हैं। इसके बाद वैज्ञानिक जमीन पर उस डेटा को डाउनलोड करके उसकी जांच करते हैं, जिसमें कई घंटों या दिनों का समय लगता है और इंटरनेट बैंडविड्थ पर भारी खर्च आता है।
लेकिन MOI-1A सैटेलाइट इस पूरी प्रक्रिया को बदलने जा रहा है:
- काम की जानकारी ही आएगी नीचे: यह सैटेलाइट तस्वीरों को क्लिक करते ही अंतरिक्ष में ही उनका एनालिसिस कर लेगा। टेकमीटूस्पेस (TakeMe2Space) के अनुसार, यदि सैटेलाइट 200 GB डेटा जुटाता है और उसमें से केवल 2 GB ही काम का है, तो इसका AI मॉडल सिर्फ उसी जरूरी 2 GB डेटा को प्रोसेस करके पृथ्वी पर भेजेगा।
- लागत में भारी कटौती: फालतू और भारी डेटा को न भेजने के कारण डेटा डाउनलोड करने का समय और खर्च दोनों 90% तक कम हो जाएंगे।
NVIDIA प्रोसेसर की सुपरफास्ट कंप्यूटिंग पावर
लगभग 14 किलोग्राम वजन वाले इस कॉम्पैक्ट सैटेलाइट में अद्भुत क्षमताएं हैं। इसके ऑन-बोर्ड कंप्यूटर को चलाने के लिए NVIDIA Orin NX प्रोसेसर का इस्तेमाल किया गया है। यह प्रोसेसर 117 TOPS (Trillion Operations Per Second) की कंप्यूटिंग पावर जनरेट कर सकता है, जिससे अंतरिक्ष में बेहद जटिल AI मॉडल्स को पलक झपकते ही रन किया जा सकेगा।
इन क्षेत्रों में होगा सीधा फायदा
कंपनी ने इस मिशन के साथ कृषि, खनन (Mining), इंश्योरेंस और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों से जुड़े 23 कमर्शियल और शैक्षणिक कस्टमर्स को जोड़ा है।
- सटीक आपदा प्रबंधन: बाढ़ या भूस्खलन की स्थिति में यह सैटेलाइट तुरंत प्रभावित क्षेत्र की सटीक लोकेशन का आकलन कर जमीन पर सिर्फ उतनी ही लाइव जानकारी भेजेगा, जिससे राहत टीमें बिना समय गंवाए एक्शन ले सकें।
- स्मार्ट खेती: फसलों की सेहत की निगरानी और मिट्टी में आए बदलावों की रीयल-टाइम रिपोर्ट बिना किसी देरी के मिल सकेगी।
- OrbitLab प्लेटफॉर्म: शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए कंपनी ने एक ‘ऑर्बिट लैब’ वेब प्लेटफॉर्म भी तैयार किया है, जहां वे खुद के तैयार किए गए AI मॉडल को सीधे लाइव सैटेलाइट पर अपलोड करके टेस्ट कर सकते हैं।
कंपनी का अगला बड़ा लक्ष्य साल 2028 तक अंतरिक्ष में बड़े डेटा सेंटर स्थापित करना है, जो भारत को वैश्विक स्पेस इकोनॉमी का सबसे बड़ा हब बना सकता है।
