मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में प्रशासनिक अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। शहर के वार्ड क्रमांक 59 में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की गई, जिस पर क्षेत्रीय भाजपा पार्षद डॉ. रूपाली पेंढारकर ने गहरी आपत्ति जताई है। सूचना न मिलने और प्रोटोकॉल के उल्लंघन से नाराज पार्षद ने निगम के अधिकारियों को कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में जनप्रतिनिधियों की इस तरह उपेक्षा की गई, तो इसका अंजाम बेहद बुरा होगा।
वार्ड में आयोजन, जनप्रतिनिधि ही बेखबर
पूरा विवाद अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर आयोजित एक सम्मान समारोह से जुड़ा है। वार्ड 59 में यह कार्यक्रम सामाजिक न्याय विभाग और नगर निगम के आपसी समन्वय से आयोजित किया जा रहा था। प्रशासनिक नियमों और तय प्रोटोकॉल के मुताबिक, स्थानीय पार्षद और क्षेत्रीय विधायक को इसकी आधिकारिक सूचना दी जानी अनिवार्य थी।
विवाद की स्थिति तब निर्मित हुई जब बिना किसी पूर्व सूचना के, पार्षद के ही क्षेत्र से बुजुर्गों को समारोह स्थल तक लाने के लिए नगर निगम की गाड़ियां और कर्मचारी सक्रिय हो गए। अपने ही क्षेत्र में चल रही इस प्रशासनिक हलचल की भनक जब पार्षद डॉ. रूपाली पेंढारकर को लगी, तो वे अधिकारियों की इस कार्यप्रणाली से स्तब्ध रह गईं। सूचना के अभाव में उनके पिता और वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता अरुण पेंढारकर ने मौके पर पहुंचकर विभागीय अधिकारियों से कार्यक्रम की रूपरेखा और आमंत्रण को लेकर सवाल-जवाब किए।
‘हमारी ही जमीन पर मनमानी मंजूर नहीं’– डॉ. रूपाली पेंढारकर
समारोह स्थल पर अफसरों की लापरवाही को देखते हुए पार्षद डॉ. रूपाली पेंढारकर का आक्रोश फूट पड़ा। उन्होंने अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए साफ शब्दों में कहा कि उनके ही वार्ड में जनता से जुड़ा इतना बड़ा आयोजन हो रहा है, लेकिन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति को ही पूरी तरह अंधेरे में रखा गया।
अधिकारियों के इस अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर सीधी आपत्ति जताते हुए उन्होंने तीखी चेतावनी दी कि उनके क्षेत्र में प्रशासनिक मनमानी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि आगामी आयोजनों में जनप्रतिनिधियों की गरिमा और प्रोटोकॉल का ध्यान नहीं रखा गया, तो इसके गंभीर परिणाम अधिकारियों को भुगतने होंगे। तीखी बहस के बाद वे असंतोष जताते हुए कार्यक्रम से बाहर आ गईं।
प्रभारी महापौर ने संभाला मोर्चा, अधिकारियों पर उठे सवाल
समारोह के दौरान हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और जनप्रतिनिधियों के वॉकआउट के बाद कार्यक्रम में मौजूद प्रभारी महापौर (एमआईसी सदस्य) राजेंद्र राठौर ने तत्काल हस्तक्षेप किया। उन्होंने नाराज पार्षद और उनके परिवार को मनाने की कोशिश की और अधिकारियों की इस बड़ी प्रशासनिक चूक पर गहरी चिंता जताई।
राठौर ने स्वीकार किया कि स्थानीय स्तर पर किसी भी सरकारी कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित न करना और उन्हें जानकारी न देना एक गंभीर लापरवाही है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर इंदौर नगर निगम के मैदानी अधिकारियों की कार्यशैली और समन्वय क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
