बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय मुद्रा चमकी, 6 हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा ‘रुपया’; जानें मुख्य वजहें
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।
घरेलू शेयर बाजारों में जारी अनिश्चितता और गिरावट के माहौल के बीच विदेशी मुद्रा बाजार से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है। शुरुआती कारोबार में अमेरिकी मुद्रा (US Dollar) के मुकाबले भारतीय रुपया (Indian Rupee) आज शानदार बढ़त दर्ज करने में कामयाब रहा। सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर की तुलना में 10 पैसे की जोरदार रिकवरी के साथ 94.39 के स्तर पर खुला, जो पिछले लगभग 6 हफ्तों में इसका सबसे मजबूत और उच्चतम स्तर है। इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 94.49 के स्तर पर बंद हुआ था।
केंद्रीय बैंक की नीतियों और विदेशी पूंजी के मजबूत प्रवाह के कारण रुपया लगातार अपनी खोई हुई जमीन वापस पा रहा है।
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रुपये की इस शानदार मजबूती के 3 बड़े ट्रिगर
करेंसी मार्केट के जानकारों और आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, शेयर बाजार के दबाव में होने के बावजूद रुपये को इन 3 प्रमुख कारकों से जबरदस्त सपोर्ट मिला है:
- 1. FCNR-B डिपॉजिट्स में रिकॉर्ड उछाल: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के विशेष पूंजी उपायों को विदेशी बाजार से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक (FCNR-B) जमा योजना के तहत करीब 136.4 अरब डॉलर का रिकॉर्ड फंड जुटाया गया है। इस भारी इनफ्लो (पूंजी प्रवाह) ने डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को काफी मजबूत कर दिया है।
- 2. आरबीआई का सुरक्षा कवच: विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये में किसी भी अप्रत्याशित गिरावट को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक काफी मुस्तैद है। आरबीआई लगातार बाजार में तरलता (Liquidity) की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अत्यधिक डॉलर सप्लाई को संतुलित करने के लिए सक्रिय रूप से बाजार में दखल दे रहा है, जिससे रुपये को एक मजबूत बेस मिला है।
- 3. कच्चे तेल में थोड़ी राहत और डॉलर इंडेक्स: वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों में बीच-बीच में आने वाली नरमी और वैश्विक बाजार में डॉलर की एकतरफा तेजी पर लगे ब्रेक ने भी भारतीय मुद्रा के हक में काम किया है। इससे भारत के आयात बिल का दबाव कम हुआ है।
आगे क्या है विशेषज्ञों की राय?
करेंसी डीलर्स का मानना है कि लघु अवधि (Short Term) में रुपया अपनी मजबूती को बरकरार रख सकता है क्योंकि बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस 10 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर को पार कर गया है। हालांकि, पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आने वाले उछाल से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वैश्विक मोर्चे पर कोई बड़ा संकट नहीं आता है, तो मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और मजबूत घरेलू आर्थिक फंडामेंटल्स के चलते आने वाले दिनों में रुपये की यह स्थिरता बनी रहेगी।
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