Home विदेश न्यूयॉर्क में हंगामा: ‘आपके AI सेंटर्स की वजह से भारत में मेरा...

न्यूयॉर्क में हंगामा: ‘आपके AI सेंटर्स की वजह से भारत में मेरा परिवार सूखे से मर रहा है!’, भारतीय छात्र ने सरेआम Nvidia अधिकारी को मंच पर घेरा

0

न्यूयॉर्क में हंगामा: ‘आपके AI सेंटर्स की वजह से भारत में मेरा परिवार सूखे से मर रहा है!’, भारतीय छात्र ने सरेआम Nvidia अधिकारी को मंच पर घेरा

(NTV TIME): अमेरिका के न्यूयॉर्क में चल रहे ‘क्लाइमेट वीक एनवाईसी’ (Climate Week NYC) के दौरान एक हैरान कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। मंच पर चर्चा के दौरान एक भारतीय छात्र ने दुनिया की सबसे मूल्यवान टेक कंपनियों में से एक, एनवीडिया (Nvidia) के सस्टेनेबिलिटी हेड जॉश पार्कर (Josh Parker) को सरेआम टोक दिया। सुरक्षाकर्मियों द्वारा जबरन बाहर निकाले जाने के दौरान छात्र ने चिल्लाते हुए कहा कि एआई (AI) डेटा सेंटर्स के कारण पैदा हो रहे पर्यावरण संकट की वजह से भारत में उसका परिवार सूखे की मार झेल रहा है।

‘शर्म करो पार्कर…’ लाइव शो के दौरान क्या हुआ?

यह घटना तब हुई जब एनवीडिया के अधिकारी जॉश पार्कर मंच पर एक पैनल डिस्कशन में हिस्सा ले रहे थे। तभी दर्शकों के बीच बैठा एक भारतीय छात्र अचानक खड़ा हो गया और उसने सीधे एनवीडिया की पर्यावरण नीतियों पर सवाल उठाना शुरू कर दिया।

छात्र ने बेहद आक्रामक अंदाज में चिल्लाते हुए कहा:

“शर्म करो पार्कर! आप यहाँ बैठकर पर्यावरण की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन आपकी कंपनी ने लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जित की है। आपके एआई (AI) डेटा सेंटर्स की वजह से आज भारत में मेरा परिवार सूखे से मर रहा है। जब दुनिया के लोग इस विनाश को भुगत रहे हैं, तो आप यहाँ मंच पर कैसे बैठ सकते हैं?”

शुरुआत में हॉल में मौजूद लोग हैरान रह गए, जिसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों ने छात्र को पकड़ लिया और जबरन हॉल से बाहर का रास्ता दिखाया। बाहर जाते समय भी छात्र लगातार एनवीडिया के खिलाफ नारेबाजी करता रहा।

एआई (AI) और डेटा सेंटर्स से भारत को क्या खतरा? (संपादकीय विश्लेषण)

यह विरोध प्रदर्शन भले ही न्यूयॉर्क में हुआ हो, लेकिन इसने पूरी दुनिया का ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के पीछे छिपे पर्यावरण संकट की तरफ खींचा है:

  • पानी की भारी खपत: एआई मॉडल (जैसे चैटजीपीटी या एनवीडिया के सुपरकंप्यूटर) को प्रोसेस करने वाले डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए लाखों गैलन साफ पानी की जरूरत होती है।
  • बिजली और कार्बन उत्सर्जन: एआई के सर्वर 24 घंटे चलते हैं, जिससे भारी मात्रा में बिजली की खपत होती है और कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है। पर्यावरणविदों का मानना है कि इससे ग्लोबल वार्मिंग तेज हो रही है, जिसका सीधा असर भारत जैसे कृषि प्रधान देशों के मानसून चक्र पर पड़ रहा है।

इजरायल डील और सैन्य इस्तेमाल का भी विरोध

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विरोध कर रहे छात्रों के समूह ने केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि एनवीडिया के इजरायल के साथ हुए $500 मिलियन (करीब 4,100 करोड़ रुपये) के सौदे पर भी आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि टेक कंपनियाँ ऐसे एडवांस एआई टूल्स बना रही हैं, जिनका इस्तेमाल युद्ध और सैन्य अभियानों में किया जा रहा है।

इस घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर दो धड़े बन गए हैं। एक पक्ष छात्र की बहादुरी और पर्यावरण के प्रति उसकी चिंता की तारीफ कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे केवल एक पब्लिसिटी स्टंट और बदतमीजी करार दे रहा है। एनवीडिया की तरफ से अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version